October 25, 2020

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हाथरस केस में एफएसएल टेस्ट के लिए 11 दिन बाद लिए गए सैंपल

एएमयू के सीएमओ डॉक्टर अजीम मलिक ने कहा- नहीं हो सकती रेप की पुष्टि

लखनऊ:- हाथरस कांड में यूपी पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गैंगरेप की बात से इनकार कर रही है। वारदात के बाद पीड़िता को दो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में एडमिट कराया गया था। यहां के चीफ मेडिकल ऑफिसर (सीएमओ) का कहना है एफएसएल रिपोर्ट जिसके आधार पर यूपी पुलिस लड़की के साथ गैंगरेप नहीं होने का दावा कर रही है, उसके सैंपल वारदात के 11 दिन बाद लिए गए थे। ऐसे में इस रिपोर्ट की कोई वैल्यू नहीं है। सीएमओ डॉक्टर अजीम मलिक ने कहा- ‘वारदात के 11 दिन बाद सैंपल लिए गए थे। जबकि ऐसे अपराध के 96 घंटे बाद तक फोरेंसिक सबूत पाए जा सकते हैं। इससे देरी होने पर रेप या गैंगरेप की पुष्टि नहीं हो सकती है।
उल्लेखनीय है कि एएमयू अस्पताल में 22 सितंबर को जब उसे होश आया, तो उसने इशारों में अपने साथ हुए दरिंदगी की जानकारी परिवार को दी। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने कहा था, ‘फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी रिपोर्ट में लड़की के शरीर में कोई स्पर्म नहीं मिला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लड़की की मौत मारपीट के कारण हुई है। अधिकारियों के बयान के बाद भी मीडिया गलत जानकारी प्रसारित कर रही है। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स पर भरोसा करें, तो पीड़िता के परिजन और एक आरोपी परिवार की करीब 23 साल पुरानी दुश्‍मनी है। पीड़‍िता के पिता ने एक आरोपी संदीप के पिता पर तब एससी/एसटी ऐक्‍ट और मारपीट की एफआईआर लिखाई थी। ठाकुर बहुल बूलघड़ी गांव में वाल्‍मीकी समाज के लोग गिनती के हैं। गांव में ठाकुर समाज के दो गुट बताए जा रहे हैं। एक गुट के साथ वाल्‍मीकी समाज के लोग हैं। दूसरा गुट युवती की मौत के आरोपी संदीप, रामू, लवकुश और रवि पक्ष का है।

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