October 25, 2020

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एलआईसी की लंबी छलांग, विदेशी बाजारों में होगी सूचीबद्ध

नई दिल्ली:- ‘जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी’ की टैग लाइन वाली देश के सार्वजनिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित और नई सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी को विदेशी बाजारों में सूचीबद्ध किया जा सकता है। सरकार इस संभावना पर गंभीरता से विचार कर रही है। माना जा रहा है कि इसके जरिए सरकार विदेशी निवेशकों को ठोस संदेश देना चाहती है। सरकार पहले ही एलआईसी में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने की घोषणा कर चुकी है। इसके लिए आईपीओ लाने की तैयारी चल रही है। हाल में खबर आई थी कि सरकार एलआईसी में 25 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकती है। इसके लिए उसे एलआईसी एक्ट में बदलाव करना होगा। साथ ही भारतीय कंपनियों को सीधे विदेशी शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कराने के लिए भी कंपनी कानून में बदलाव होगा। सरकार ने बजट में एलआईसी में विनिवेश की घोषणा की थी। डेलॉयट और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स को एलआईसी के लिए ट्रांजैक्शन एडवाइजर बनाया गया है। साथ ही एलआईसी एक्ट में संशोधन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। मौजूदा कानून के मुताबिक एलआईसी में केवल सरकार की ही हिस्सेदारी हो सकती है।
एलआईसी अपने मूल्यांकन के लिए फर्म नियुक्त करने की प्रक्रिया में है। सूत्रों के मुताबिक एलआईसी में विनिवेश के लिए संसद के शीतकालीन सत्र में विधेयक लाया जा सकता है। कंपनी का आईपीओ वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में आ सकता है। एक सूत्र ने कहा कि कानून में बदलाव के बावजूद एलआईसी पर सरकार का नियंत्रण बना रहेगा। एलआईसी में हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को अपनी वित्तीय स्थिति दुरुस्त करने में मदद मिलेगी। कोविड-19 महामारी को कारण इकॉनमी त्रस्त है और राजकोषीय घाटा बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। सरकार ने वित्त वर्ष 2021 के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य जीडीपी का 3.5 फीसदी तय किया है। सरकार ने इस वित्त वर्ष के दौरान विनिवेश से 2.1 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है लेकिन अभी तक वह केवल 57 अरब रुपये ही जुटा पाई है। एलआईसी में हिस्सा बेचकर सरकार इस लक्ष्य को हासिल कर सकती है। आज के वैल्यूएशन के हिसाब से एलआईसी में अपनी 25 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने पर केंद्र सरकार को 2 लाख करोड़ रुपए मिल सकते हैं। हालांकि, एलआईसी के कर्मचारी और विपक्षी पार्टियां एलआईसी के विनिवेश का विरोध कर रही हैं।

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