October 31, 2020

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जदयू और भाजपा का तालमेल बढ़ता रहा दोनों दलों का वोट प्रतिशत

नई दिल्ली:- बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू और भाजपा दस साल बाद फिर से एकबार इकट्ठे चुनावी अखाड़े में ताल ठोंकने को तत्पर हैं। दोनों ही दल यह दावा करते रहे हैं कि उनका स्वाभाविक गठबंधन है और दोनों की आपसी समझ भी काफी बेहतर है। एनडीए के दोनों ही प्रमुख दलों को बिहार की जनता भी सिर आंखों पर बिठाती रही है। इस चुनाव में जनता इन पर या महागठबंधन के दलों पर मेहरबान होती है, यह तो भविष्य बताएगा लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव के आंकड़े तस्दीक कर रहे हैं कि जब-जब ये दोनों दल साथ लड़े जदयू का वोट प्रतिशत हर बार बढ़ता चला गया। जदयू का साथ मिलने से 2005 के फरवरी में हुए बिहार विधानसभा के चुनाव से ही भारतीय जनता पार्टी के भी वोट प्रतिशत में चुनाव-दर-चुनाव इजाफा होता चला गया। बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू और भाजपा दस साल बाद फिर से एकबार इकट्ठे चुनावी अखाड़े में ताल ठोंकने को तत्पर हैं। दोनों ही दल यह दावा करते रहे हैं कि उनका स्वाभाविक गठबंधन है और दोनों की आपसी समझ भी काफी बेहतर है। एनडीए के दोनों ही प्रमुख दलों को बिहार की जनता भी सिर आंखों पर बिठाती रही है। इस चुनाव में जनता इन पर या महागठबंधन के दलों पर मेहरबान होती है, यह तो भविष्य बताएगा लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव के आंकड़े तस्दीक कर रहे हैं कि जब-जब ये दोनों दल साथ लड़े जदयू का वोट प्रतिशत हर बार बढ़ता चला गया। जदयू का साथ मिलने से 2005 के फरवरी में हुए बिहार विधानसभा के चुनाव से ही भारतीय जनता पार्टी के भी वोट प्रतिशत में चुनाव-दर-चुनाव इजाफा होता चला गया। वर्ष 2003 में समता पार्टी जदयू में तब्दील हुई। वर्ष 1995 के बिहार विधानसभा चुनाव में समता पार्टी अकेले ही मैदान में उतरी थी। संयुक्त बिहार की 310 विस सीटों पर उसने प्रत्याशी उतारे थे। हालांकि जीत महज सात फीसदी सीटों पर मिली थी। तब हरनौत से नीतीश कुमार, धनहा से विष्णु प्रसाद कुशवाहा, गोविंदगंज से देवेन्द्र नाथ दुबे, तारापुर से शकुनी चौधरी, नालंदा से श्रवण कुमार, चंडी से अनिल सिंह और इमामगंज से रामस्वरूप पासवान समता पार्टी के टिकट पर जीते थे।

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