October 22, 2020

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दुनिया के गरीबों तक कोरोना टीका पहुंचाने के प्रयास‘कोवैक्स’ के समक्ष आर्थिक संकट गहराया

लंदन:- वैश्विक महामारी कोरोना से जूझ रही दुनिया के सबसे गरीब लोगों के पास इसके टीका पहुंचाने के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी परियोजना ‘कोवैक्स’ को धन, मालवाहक विमान, टीके और उन्हें फ्रिज में रखने की सुविधा की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसमें सबसे बड़ी बाधा अमीर देशों का कोरोना वायरस के संभावित टीकों की 2021 की खेप के एक बड़े हिस्से के लिए दवा कंपनियों के साथ समझौता कर लेना है। चीन, फ्रांस, जर्मनी, रूस और अमेरिका जैसे देशों ने कोवैक्स में शामिल होने की इच्छा नहीं दिखाई है। अमेरिका और अन्य कुछ देशों ने कोवैक्स में शामिल होने इनकार कर दिया है। उन्होंने कोरोना वायरस के संभावित टीके के लिए 2021 की आपूर्ति के एक बड़े हिस्से के लिए सीधे दवा कंपनियों के साथ समझौता किया है। डॉक्टर्स विदआउट बॉर्डर्स के साथ पहले काम कर चुके स्वास्थ्य परामर्शक रोहित मालपानी ने कहा, ‘निकट अवधि में टीके की आपूर्ति होती नहीं दिख रही है और ना ही इसके लिए पैसा है।’ कोवैक्स की अवधारणा देशों को उनकी माली हालत देखे बिना कोरोना वायरस के टीके तक पहुंच उपलब्ध कराने को लेकर बनाई गई थी। इस परियोजना को तैयार करने में विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ-साथ दुनिया के 60 प्रतिशत बच्चों के लिए टीकाकरण अभियान चलाने वाले लोक-निजी गठबंधन गवी और कोलिएशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनैस इनोवेशंस (सीईपीआई) ने भी काम किया। इसमें गवी और सीईपीआई को बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन की ओर से भारी मात्रा में मौद्रिक मदद मिलती है।
कोवैक्स का लक्ष्य 2021 के अंत तक कोरोना वायरस के संभावित टीके की दो अरब खुराक जुटाना है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कोविड-19 का जो टीका सफल होगा उसकी प्रत्येक व्यक्ति को एक या दो या कितनी खुराक चाहिए होंगी। इस परियोजना में भागीदारी करने वाले देश टीके को चाहे तो कोवैक्स से खरीद भी सकते हैं या जरूरत पड़ने पर मुफ्त में भी ले सकते हैं। कोवैक्स के सामने जो शुरुआती बड़ी समस्या उभरकर सामने आई वो यह कि दुनिया के कुछ सबसे अमीर देशों ने दवा कंपनियों के साथ टीके को लेकर सीधे बातचीत या समझौते कर लिए। इन देशों ने टीके को अनुमति मिलने से पहले ही उसकी 2021 की एक बड़ी आपूर्ति के लिए सौदे कर लिए। इसका मतलब उन्हें इस महत्वकांक्षी परियोजना में भागीदार होने की जरूरत नहीं।
इतना ही नहीं यूरोपीय संघ ने कोवैक्स को 40 करोड़ डॉलर की मदद देकर समर्थन किया लेकिन 27 देशों का यह संघ कोवैक्स को टीका खरीदने में उपयोग नहीं करेगा। इसे कुछ लोग परियोजना की टीकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने की क्षमता में कमी के रूप में देखते हैं। गवी, विश्व स्वास्थ्य संगठन और सीईपीआई ने सितंबर में घोषणा की थी कि विश्व की दो तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले देश कोवैक्स में शामिल हुए हैं लेकिन साथ ही माना था कि उन्हें सरकारों से करीब 40 करोड़ डॉलर और चाहिए। संवाद समिति ने इस हफ्ते होने जा रही संगठन की बैठक से पहले दस्तावेजों को देखा है और इन आंतरिक दस्तावेजों के मुताबिक उपरोक्त राशि के बिना गवी टीके खरीदने के लिए समझौते नहीं कर सकती है। कोवैक्स इस हफ्ते भारतीय टीका विनिर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट के साथ भी 20 करोड़ खुराक खरीदने का समझौता नहीं कर सकी। कंपनी ने स्पष्ट कर दिया है कि उसके उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा भारत के लोगों को जाएगा।

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