October 22, 2020

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बिहार विस चुनाव में चिराग के समक्ष बड़ी चुनौती-एनडीए का दामन थामे या ‘एकला चलो रे’

नई दिल्ली:- अगले साल बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में पहले फेज के लिए उम्मीदवारों के नामांकन की प्रक्रिया गुरुवार से आरंभ हो गई। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक तीन प्रत्याशियों ने पहले दिन अपना पर्चा दाखिल भी कर दिया लेकिन अगर दोनों बड़े राजनीतिक गठबंधनों की बात करें तो ‘फाइनल सेटलमेंट’ होता नहीं दिख रहा। एक तरफ, सत्ताधारी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) में सीटों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है तो वहीं चिराग पासवान अब भी जेडीयू के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। दूसरी तरफ, महाठबंधन के भीतर भी सीटों का तालमेल बनता नहीं दिख रहा है। राज्य में महाठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस के बीच सीटों पर समन्वय नहीं हो पा रहा है। आरएलएसपी के उपेंद्र कुशवाहा तो मायावती के साथ गठबंधन भी कर चुके हैं। हालांकि इन सबके बीच चिराग पासवान की अगुवाई वाली लोक जनशक्ति पार्टी को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है। तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच बीते मंगलवार को एलजेपी के जनरल सेक्रेटरी शहनवाज अहमद कैफी ने यह कहकर सबको चौंका दिया कि चिराग पासवान उनकी पार्टी के सीएम उम्मीदवार हैं। अब एलजेपी का यह बयान बीजेपी के ताजा बयान से बिल्कुल उलट है। गौरतलब है कि बीजेपी की तरफ से साफ किया जा चुका है कि चुनाव नीतीश कुमार की अगुवाई में ही लड़ा जाएगा। और वो ही राज्य के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। कैफी ने कहा था कि पार्टी सदस्यों का भी यही मानना है कि हमें कम से कम 143 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए। मैं भी पार्टी से यही गुजारिश करूंगा। रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को चिराग पासवान ने भी भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर सीटों के बंटवारे पर जल्द ही फैसला लेने की मांग की। पिछले दो हफ्तों में पासवान की भाजपा नेतृत्व के साथ यह दूसरी मुलाकात थी। इससे पहले 15 सितंबर को पासवान ने जेपी नड्डा से मुलाकात कर भाजपा को जेडीयू से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही थी। पासवान ने पीएम नरेंद्र मोदी को भी इस पूरे मामले पर पत्र लिखकर अवगत कराया था। पत्र में आगामी चुनाव में मौजूदा मुख्यमंत्री के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर होने की बात का जिक्र भी प्रमुखता के साथ किया गया था। चिराग पासवान के राजनीतिक तेवरों को देखते हुए यह भी कयासबाजी लगाई जा रही है कि वो अकेले भी मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि जल्द ही यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि चिराग एनडीए के पाले में ही रहेंगे या फिर एकला चलो रे का बिगुल फूकेंगे। इसके पहले उन्हें अपनी राजनीतिक जमीन का अंदाजा भी लगाना पड़ेगा। ये अभी उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है।

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