October 28, 2020

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बाबू का रांची से रहा है विशेष लगाव,अपने हाथों से छोटानागपुर खादी ग्राम उद्योग की स्थापना की

राँची:- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को रांची से विशेष लगाव था।यही वजह है कि वर्ष 1928 में महात्मा गांधी और डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने रांची के धुर्वा में अपने हाथों छोटानागपुर खादी ग्राम उद्योग की स्थापना की। तब से लेकर आज तक यह संस्थान गांधी जी के आदर्श और सिद्धांत का वाहक बना हुआ है। महात्मा गांधी के हाथों स्थापित रांची के धुर्वा में स्थित छोटानागपुर खादी ग्रामोद्योग संस्थान को तिरिल आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। संस्थान के संरक्षक अभय कुमार चौधरी बताते हैं कि वर्ष 1928 में धुर्वा में यह संस्थान बापू के हाथों स्थापित किया गया था। उस समय महात्मा गांधी और डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने 4 दिनों तक प्रवास भी किया था। अभय कुमार चौधरी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता अभियान,आत्मनिर्भर भारत और लोकल प्रोडक्ट को बढ़ावा देने के लिए जो मुहिम चलाई है उस मुहिम में यह संस्थान कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। काफी लंबे समय से संस्थान से जुड़े श्याम किशोर लाल कहते हैं कि सुदूरवर्ती गांव तक के जरूरतमंद लोगों को खादी से जोड़ा गया है और उन्हें रोजगार मुहैया कराया गया है। खादी से जुड़ने के बाद गांव और ग्रामीणों की स्थिति में काफी बदलाव आया है।
संस्थान से जुड़े युवक अनुकूल राज महात्मा गांधी और खादी से बेहद ही ज्यादा प्रभावित दिखते हैं। उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि वह जिस संस्थान में काम करते हैं उसकी स्थापना खुद महात्मा गांधी ने की थी। इनका कहना है कि वर्तमान समय में जो वैश्विक तनाव की स्थिति नजर आ रही है उसका हल सिर्फ महात्मा गांधी के अहिंसा वादी विचारधारा से ही संभव है।
आजादी से पहले स्थापित छोटानागपुर खादी ग्राम उद्योग संस्थान ने काफी लंबा सफर तय किया है। लगभग 24 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस संस्थान को गुजरात के वर्धा की तर्ज पर विकसित किया जाए तो रोजगार के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की पूरी संभावना है।

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