October 21, 2020

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पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास व अन्य के खिलाफ एसीबी जांच का आदेश

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मुख्यमंत्री ने मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति में अनियतिता मामले में जांच कराने का आदेश दिया

रांची:-  मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने रांची शहर के सीवरेज-ड्रेनेज निर्माण का डीपीआर तैयार करने के लिए मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति में तत्कालीन नगर विकास मंत्री रघुवर दास एवं अन्य के द्वारा की गयी अनियमितता, भ्रष्टाचार एवं षड्यंत्र के विरुद्ध कानून की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई करने के मामले में विधायक सरयू राय द्वारा दायर परिवाद पत्र और उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में अग्रेतर कार्रवाई के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ,एसीबी से जांच कराने का आदेश दिया है।
विधायक सरायू राय की ओर से मुख्यमंत्री को यह जानकारी दी गयी थी कि इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो , एसीबी ने अग्रेतर कारवाई के लिये सरकार से अनुमति देने की मांग की गयी थी, इसके पूर्व भी तत्कालीन निगरानी ब्यूरो ने 2009 से 2011 के बीच पाँच बार इस मामले की जाँच के लिये सरकार से अनुमति माँगा था, जो नहीं मिली थी। जांच की मांग करने वाले विधायक सरयू राय का कहना है कि अबतक हुई इस कांड की जाँच में पाया गया है कि अयोग्य होने के बावजूद मेनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति हुई, एक षड्यंत्र के तहत तथ्यों की अनदेखी की गई, जाँच के निष्कर्षों को दबाया गया।
विधायक सरयू राय की ओर से बताया गया है कि रांची शहर में सिवरेज- ड्रेनेज का निर्माण करने के लिये 2003 में दो परामर्शी नियुक्त हुये थे, लेकिन सरकार बदलने के बाद इन दोनों को हटाने का षड्यंत्र हुआ। इनमें से एक परामर्शी की रिट याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त आर्बिट्रेटर (केरल उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त मुख्य न्यायाधीश) ने न्याय-निर्णय दिया कि तत्कालीन सरकार द्वारा इसे हटाना गलत था, इसलिये सरकार इसे 3.61 करोड़ रूपया मुआवजा दे। इसके बाद नया परामर्शी नियुक्त करने के लिये विश्व बैंक के गुणवता आधारित प्रणाली के नाम पर निविदा प्रकाशित करने का षड्यंत्र हुआ। कारण कि इस प्रणाली में वित्तीय प्रतिस्पर्द्धा नहीं होती है। जबकि यह कार्य इस प्रणाली की विशिष्टियों के अनुरूप नहीं था। उन्होंने बताया कि निविदा के मूल्याँकन के दौरान पाया गया कि कोई भी निविदादाता निविदा शर्तों के आधार पर योग्य नही है। मूल्याँकन समिति ने कहा कि निविदा रद्द की जाय और नई निविदा गुणवता एवं लागत प्रणाली के आधार निकाली जाय। परन्तु मंत्री स्तर पर निविदा मूल्याँकन समिति का यह सुझाव अस्वीकार कर दिया गया। षड्यंत्रपूर्वक मंत्री का निर्देश हुआ कि निविदा शर्तों में बदलाव कर निविदा का पुनर्मूल्यांकन करें। उन्होंने बताया कि निविदा शर्तों में अनुचित बदलाव के बावजूद मेनहर्ट योग्य नहीं ठहर रहा था। इसके बावजूद षड्यंत्रपूर्वक इसे योग्य घोषित किया गया। सरयू राय का कहना है कि निविदा के तकनीकी मूल्याँकन के दौरान भी खुला षड्यंत्र हुआ। मेनहर्ट के पक्ष में खुला पक्षपात हुआ। इसे सबसे अधिक अंक देकर तकनीकी दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया। तत्कालीन निगरानी ब्यूरो के तकनीकी कोषांग ने अपनी जाँच में इस षड्यंत्र का पर्दाफाश किया है। उन्होंने बताया कि गुणवत्ता आधारित प्रणाली की निविदा शर्तों के मुताबिक केवल तकनीकी रूप से सर्वश्रेष्ठ करार दिये गये निविदादाता का ही वित्तीय लिफाफा खुलना था। वित्तीय निगोशियेशन में भी जानबूझकर लागत दर बढ़ाने का षड्यंत्र किया गया। इसका पर्दाफाश भी निगरानी ब्यूरो के तकनीकी कोषांग ने अपनी जाँच में किया है। मैनहर्ट नियुक्ति मामले में अनियमितता का मामला कई बार विधानसभा में भी जोर शोर से उठा और विधानसभा की कार्यवाही बाधित रही थी।

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