October 21, 2020

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क्या बाबरी में ‘बरी’ से बिहार चुनाव में होगा बीजेपी का बेड़ा पार

बिहार में लालू के राजद की ताकत एमवाए का रुख डालेगा असर

पटना:- मिथिला के पाहुन मर्यादा पुरुषोतम श्रीराम हैं। अब भला जिस मिथिला के दामाद खुद प्रभु श्री राम हों उस राम को ससुराल वाले कैसे भूल सकते हैं और मौका जब चुनाव का हो तो फिर भूलने का सवाल नहीं उठता है, खास तौर पर तब जबकि राम मंदिर आंदोलन का बिहार से पुराना नाता रहा है। याद कीजिए 23 अक्टूबर 1990 की वो तारीख, जब सोमनाथ से रथयात्रा लेकर पहुंचे लालकृष्ण आडवाणी को समस्तीपुर में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव ने गिरफ्तार करवा कर मसान जोर स्थित मयूराक्षी सिंचाई परियोजना के निरीक्षण भवन में भेज दिया। आडवाणी को मसानजोर में करीब 12 दिन रखा गया था। इस घटना के बाद ही कांग्रेस से मुस्लिम वोट छिटककर लालू के पाले में आ गया और लालू को एमवाय समीकरण के तौर पर ऐसी ताकत मिली थी, जिसके दम पर 15 साल बिहार में शासन किया। आज भी आरजेडी के लिए एमवाय समीकरण बड़ी ताकत माना जाता है।
वैसे मिथिला के पहुना को इस बार के चुनाव में भी याद किया जा रहा है तो इसके पीछे बहुत बड़ी वजह भी है, क्योंकि इस बार मौका बेहद खास है। दरअसल बीजेपी का सबसे बड़ा मुद्दा रहा है राम मंदिर जिसे बीजेपी ने हर चुनाव से पहले अपने घोषणा पत्र में प्रुमखता से जगह दी। उस राम मंदिर का रास्ता पहले ही साफ हो चुका है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर का भूमिपूजन कर चुके हैं और रही सही कसर बाबरी केस पर 28 साल बाद आए सबसे बड़े फैसले ने पूरी कर दी, जिसमें लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती, विनय कटियार समेत सभी 32 आरोपी बरी कर दिए गए।

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