October 26, 2020

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विवादित ढांचा मामले का फैसला सुप्रीम कोर्ट के निष्कर्षों को नकारने जैसा : चिदंबरम

नई दिल्ली:- अयोध्या का विवादित ढांचा विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले पर विपक्षी पार्टियां सवाल उठाने लगी हैं। लगातार कहा जा रहा है कि विशेष अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के प्रतिकूल होने के साथ संविधान की परिपाटी को दरकिनार करने वाला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने तो बीते दिन आए इस फैसले को तर्क और सामान्य समझ की भी अवहेलना बताया है। प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले को संविधान की परिपाटी से परे बताया है। पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने ट्वीट कर विशेष अदालत के इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार और न्याय प्रणाली पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कुछ साल पहले तक यह रोना था कि ‘जेसिका को किसी ने नहीं मारा’… और आज ‘किसी ने मस्जिद को ध्वस्त नहीं किया’ प्रमुख पीड़ा है। इस दौरान उन्होंने ट्रायल कोर्ट के फैसले को संविधान की परिपाटी से इतर बताते हुए कहा कि इस एक फैसले ने सुप्रीम कोर्ट के निष्कर्षों को नकारने के अलावा तर्क और सामान्य समझ की भी अवहेलना की है। उल्लेखनीय है कि सीबीआई की विशेष अदालत ने छह दिसंबर, 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस किए जाने के मामले में बुधवार को फैसला सुनाते हुए सभी 32 आरोपितों को बरी कर दिया था। विशेष अदालत के न्यायाधीश एसके यादव ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि ढांचा विध्वंस की घटना पूर्वनियोजित नहीं थी। यह एक आकस्मिक घटना थी। इस मामले में आरोपितों के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिले है। उन्होंने यहां तक कहा कि आरोपितों ने तोड़-फोड़ के बजाय उन्मादी भीड़ को रोकने की कोशिश की थी।

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