October 31, 2020

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ट्रेड यूनियनों ने मुख्यमंत्री को सौंपा मांगों से संबंधित ज्ञापन

रांची:- बीएमएस, इंटक, एक्टू, एटक और सीटू के राज्य स्तरीय नेताओं ने प्रोजेक्ट बिलिं्डग मे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर उन्हे दो स्मार-पत्र सौंपा। जिसमें पहला स्मार-पत्र विगत चार साल से लंबित झारखंड के 980 युनियन जो एकीकृत बिहार मे निबंधित हुए थे की मान्यता बिहार के निबंधक श्रमिक संघ द्वारा रद्द किए जाने से संबंधित था। पिछली सरकार के समय से ही यह मामला अधर मे लटका हुआ है जबकि मार्च 2019 मे तत्कालीन श्रम मंत्री के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक मे जिसमें सभी ट्रेड यूनियनों समेत श्रम विभाग के उच्चाधिकारी भी शामिल थे। जिसमे यह तय हुआ था कि जिन युनियनों का वार्षिक विवरणी जमा है उनकी मान्यता को बरकरार रखते हुए पुराने निबंधन संख्या के साथ – साथ झारखंड का भी एक निबंधन संख्या प्रदान किया जायेगा। लेकिन यह सर्वसम्मत फैसला अभी तक लागू नही हो सका और युनियनो की मान्यता का मामला अभी तक लंबित पड़ा हुआ है। दुसरे स्मार पत्र मे राज्य के विभिन्न सेक्टरों के कामगारों जिसमें निर्माण, परिवहन, बीड़ी और पत्थर मजदूरों के अलावा अन्य असंगठित क्षेत्र के मजदूरो को लाकडाउन के दौरान और बाद मे भी जीविका के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उसी प्रकार राज्य के सेल्स प्रमोशन इंप्लाइज भी बड़े पैमाने पर प्रबंधन की प्रताड़ना के शिकार हो रहे हैं। महिला सेल्स प्रमोशन इंप्लाइज को मातृत्व अवकाश मांगे जाने पर बड़ी दवा कंपनियों द्वारा काम से हटाए जाने की घटना कामकाजी महिलाओं के मानवाधिकार का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है। ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने परिवहन कामगारों के लिए कल्याण बोर्ड का गठन करने,राज्य के सभी श्रमिकों को कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) और भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के दायरे मे लाने, निर्माण कामगारों के वेलफेयर बोर्ड में सभी श्रमिक संगठनों को प्रतिनिधित्व देने, न्युनतम मजदूरी का पुनरीक्षण कर उसे सख्ती से लागू करने और नये युनियनों के निबंधन की प्रक्रिया को 45 दिनों मे पुरा करने एवं श्रमिकों की अन्य ज्वलंत समस्याओं को उठाया गया था। ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने इन मुद्दों से संबंधित 10 सूत्री मांगों पर जिसका उल्लेख स्मार-पत्र मे किया गया है मुख्यमंत्री से त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया गया। ट्रेड यूनियनों ने श्रम विभाग की दक्षता को और बढ़ाने के लिए विभाग मे रिक्तियों को जल्द भरे जाने का भी सुझाव दिया। क्योंकि यहां सबसे ज्यादा कार्यबल की कमी है जिसका खामियाजा मजदूरों को भूगतना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने ट्रेड यूनियनों द्वारा उन्हे दिए गए स्मार-पत्र के कई मुद्दों पर चर्चा करते हुए आश्वासन दिया कि वे शीघ्र ही इस पर कार्रवाई करेंगे। युनियनो की मान्यता बहाल करने के लिए उन्होंने बैठक मे मौजूद अपने प्रधान सचिव को इस मुद्दे का जल्द निराकरण करने के लिए कहा। ट्रेड यूनियनों के शिष्टमंडल मे बीएमएस के महासचिव विंदेशवर प्रसाद,सचिव रंजय कुमार, इंटक के अध्यक्ष राकेश्वर पांडे, एक्टू के महासचिव शुभेंदु सेन एटक के महासचिव पी. के. गांगुली और सीटू महासचिव प्रकाश विप्लव शामिल थे।

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