October 29, 2020

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बीजीबीएस ने जीडीपी को सुधारने और राज्य में निवेश को आकर्षित करने में की मदद : मित्रा

कोलकाता:- पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेता ममता बनर्जी की सरकार में वित्त मंत्री अमित मित्रा ने बंगाल वैश्विक व्यापार सम्मेलन (बीजीबीएस) के महत्वपूर्ण नहीं होने के आरोपों को सिरे से नकारते हुए राज्यपाल जगदीप धनखड़ से कहा कि इस वार्षिक सम्मेलन ने जीडीपी को सुधारने और राज्य में निवेश को आकर्षित करने में मदद की है। व्यापार सम्मेलन आयोजित करने में कथित वित्तीय अनियमितताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने राज्य सरकार से समारोह में हुए खर्च के बारे में जानकारी मांगी थी। धनखड़ ने बीजीबीएस के तहत किए गए वास्तविक निवेश और इसके कारण पैदा हुई नौकरियों एवं इसकी उपलब्धियों के बारे में पिछले महीने जानकारी मांगी थी। मित्रा ने राज्यपाल को पत्र के जरिए दिए विस्तृत जवाब में कहा, ‘आप जानते हैं कि हम 2011 में सत्ता में आए थे। हमारी सरकार पर पहले से कर्ज का भारी बोझ था। हमारी अर्थव्यवस्था डगमगाई हुई थी और हमारे राज्य से बड़ी पूंजी बाहर चली गई थी।’ वित्त मंत्री ने 24 सितंबर को लिखे पत्र में कहा, ‘कुछ साल में, हम अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने में सफल रहे। कर्ज और जीडीपी के अनुपात को लगातार कम किया गया। लघु, मध्यम एवं बड़े उद्योगों में नया निवेश आरंभ हुआ, जिससे सरकार का राजस्व बढ़ा और रोजगार के अवसर भी पैदा हुए।’
इस पत्र को बुधवार को मीडिया के लिए जारी किया गया। मित्रा ने कहा कि सरकार ने बंगाल वैश्विक व्यापार सम्मेलन आरंभ करने का फैसला किया, ताकि निवेश को आकर्षित किया जा सके और रोजगार पैदा हो सके। मित्रा ने नीति आयोग में दिए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि बीजीबीएस को देश और दुनियाभर से निवेश को आकर्षित करने में ‘अलग नवोन्मेषी दृष्टिकोण’ के लिए राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर सराहा गया है। मोदी ने निवेश सम्मेलन आयोजित करने के लिए राज्यों की सराहना की थी।
उन्होंने बताया कि बीजीबीएस के कारण 2015 से 2019 के बीच 12,32,603 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले। मंत्री ने कहा कि 2015 और 2018 के बीच करीब 50.27 प्रतिशत निवेश प्रस्ताव क्रियान्वन के चरण में हैं। इन निवेशों से 28 लाख नौकरियां पैदा हुई हैं। उन्होंने कहा कि विकासात्मक नीतियों और बीजीबीएस के प्रभाव के कारण राज्य की जीडीपी 2010-2011 में 4.6 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2019-20 में 12.5 लाख करोड़ रुपए हो गई।

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