October 20, 2020

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एमनेस्टी का रूख और उसके बयान दुर्भाग्यपूर्ण, अतिरंजित और सच्चाई से दूर – सरकार

नई दिल्ली:- केंद्र सरकार ने एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा लगाए गए आरोपों पर बयान जारी कर कहा है कि मानवाधिकार कानून को धता बताने का बहाना नहीं हो सकता। गृह मंत्रालय ने कहा, ”एमनेस्टी इंटरनेशनल का रूख और उसके बयान दुर्भाग्यपूर्ण, अतिरंजित और सच्चाई से दूर हैं।” गृह मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत सरकार ने एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बैंक खातों को पूरी तरह से फ्रीज कर दिया है, जिसके बारे में 10 सितंबर 2020 को पता चला था, इसलिए संगठन द्वारा किए जा रहे सभी कामों को रोक दिया गया है।” हालांकि, सरकार ने कहा है कि एमनेस्टी को अवैध रूप से विदेशी धन प्राप्त हो रहा है। प्रवर्तन निदेशालय ने 2018 में बैंगलुरू में एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुख्यालय की तलाशी की थी। ये छापे विदेशी मुद्रा अधिनियम के कथित उल्लंघन के लिए किए गए थे। ज्ञात रहे कि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मंगलवार को कहा था कि वह भारत में उसके खातों के फ्रीज होने के कारण अपनी सभी गतिविधियों को रोक रहा है और दावा किया है कि उसको निराधार और प्रेरित आरोपों को लेकर लगातार निशाना बनाया जा रहा है। एमनेस्टी इंडिया ने एक बयान में कहा कि संगठन को भारत में कर्मचारियों को निकालने और उसके जारी सभी अभियान और अनुसंधान कार्यों को रोकने के लिए मजबूर किया गया है। संगठन ने दावा किया कि एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया और अन्य मुखर मानवाधिकार संगठनों, कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार रक्षकों पर हमले केवल विभिन्न दमनकारी नीतियों और सत्य बोलने वालों पर सरकार द्वारा निरंतर हमले का विस्तार है। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने कहा, ‘‘भारत सरकार द्वारा मानवाधिकार संगठनों पर निराधार और प्रेरित आरोपों को लेकर लगातार किए जा रहे हमलों की कड़ी में यह नयी घटना है।” इसी बयान पर केंद्र सरकार द्वारा जवाब आया है।

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