October 20, 2020

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बैंकों एवं फाइनेंस कंपनीज के रिकवरी एजेंटो पर लगे लगाम : फैम

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल (फैम) के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम कुमार, प्रदेश महासचिव दीपेश निराला, मीडिया सेल के चेयरमैन संजय सर्राफ एवं कोषाध्यक्ष शैलेंद्र कुमार सुमन ने संयुक्त रुप से कहा है कि बैंक/ गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों द्वारा ऋण वसूली हेतु रिकवरी एजेंट द्वारा प्रयुक्त की जाने वाली गैर कानूनी प्रक्रिया को रोकने के सम्बन्ध में फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया व्यापार मंडल (फ़ैम) द्वारा माननीया केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन को 27 सितम्बर, 2020 को एक पत्र लिखा गया और अवगत कराया गया कि कोरोना उपरांत लॉक डाउन से अर्थव्यवस्था में आयी शिथिलता के कारण व्यापारियों एवं आम जन के समक्ष एक गहरा वित्तीय संकट पैदा हो गया है। समय के इस कुचक्र के चलते व्यापारियों की एवं समाज के मध्यम वर्ग की आय बहुत प्रभावित हुई है और बैंको की या प्राइवेट कंपनियों की किस्तों में या ब्याज में डिफ़ॉल्ट आना शुरू हो गया है। जैसा की विदित है कि लघु कारोबारियों को बैंकिंग व्यवस्था से सिर्फ 5% ही ऋण सुविधा प्राप्त है। शेष 95% या तो गैर वित्तीय फाइनेंस कम्पनीज या सूदखोरों के ऋण प्राप्त करते हैं। बैंको के लिए आपके निर्देश पर रिज़र्व बैंक द्वारा काफी छूट प्रदान की गयी है, पर 95% लघु व्यापारियों के समक्ष आज भी ऋण की क़िस्त एवं ब्याज की देनदारी बनीं हुए है, क्योंकि व्यापार भलीभांति चल नहीं पा रहा है। अतः निजी क्षेत्र के बैंक एवं निजी स्त्रोतों से लिए गए ऋण अब लघु व्यापारियों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन चुके है। क़िस्त एवं ब्याज में डिफ़ॉल्ट वाहन ऋण, व्यक्तिगत ऋण, घरेलु सामान के क्रय पर ऋण या आभूषणों पर ऋण, इत्यादि प्रमुख है। प्रदेश मीडिया सेल के चेयरमैन संजय सर्राफ ने बताया है कि फैम के राष्ट्रीय महासचिव वी के बंसल द्वारा माननीय केंद्रीय वित्त मंत्री जी को अवगत कराया गया है कि निजी क्षेत्र के बैंको ने एवं निजी क्षेत्र के ऋण प्रदाता ने ऋणों की वसूली के लिए रिकवरी एजेंट रखे हुए हैं। यह क़िस्त या ब्याज न दे पाने की अवस्था में ऋणी को डराते-धमकाते हैं, और उसका सोशल अपमान करते हैं, एवं कानून को अपने हाथों में लेने से भी नहीं कतराते है। बैंक की ऋण के वसूली के लिए हमारे संविधान के अंतर्गत सिविल कानूनों की व्यवस्था की गयी है। पर रिकवरी एजेंट सब कानूनों से ऊपर होकर एक मृतप्राय व्यक्ति के खून चूसना के समान अपने किस्तों एवं ब्याज की रिकवरी हेतु सभी गैर कानूनी हथखंडो का प्रयोग करते है। फ़ैम द्वारा सरकार से आग्रह किया गया है कि जिस प्रकार अन्य संस्थाओ के लिए कुछ नियम कानून बनाए गए हैं, उसी प्रकार कुछ कानून, नियम रिकवरी एजेंट के लिए भी बनाने चाहिए। फ़ैम द्वारा कुछ सुझाव माननीय केंद्रीय वित्त मंत्री जी को भेजे भी गए हैं। प्रत्येक बैंक या वित्तीय संस्था को अपने रिकवरी एजेंटों की सूची, उन्हें सौंपे गए खातों का विवरण, पुलिस को प्रस्तुत करना अनिवार्य होना चाहिए। प्रत्येक वसूली एजेंटों को बैंक या वित्तीय संस्था के साथ हुए कारोबारी करार, बैंकों या वित्तीय संस्थानों से मिले दिशा-निर्देश, इत्यादि को पहले स्थानीय पुलिस को सौपना चाहिए। प्रत्येक वसूली एजेंटों को अपने कर्मचारियों के आपराधिक इतिहास के सम्बन्ध में भी स्थानीय पुलिस को अग्रिम सुचना देना अनिवार्य होना चाहिए, वसूली एजेंट जब भी वसूली के लिए भेजे जाएँ, सर्वप्रथम उक्त बैंक या वित्तीय संस्था द्वारा स्थानीय पुलिस को सुचना देना अनिवार्य होना चाहिय तथा ऋणी से वसूली संबंधित कोई भी वार्तालाप सिर्फ पुलिस की उपस्थिति में ही होनी चाहिए । सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी वसूली एजेंट कानून अपने हांथो में ना ले पाए, कई मामलों में गिरवी रखी गई संपत्ति या प्रतिभूति सुरक्षा का मूल्य ऋण राशि से अधिक है। ऐसे मामलों में वसूली लंबे समय तक संभव नहीं है। इस प्रकार के मामलों में वसूली केवल एक अदालत के आदेश से की जानी चाहिए। सरकार को किसी भी धमकी या धमकी के मामले में ऋणी की शिकायतों को सुनने के लिए एक विशेष अधिकारी / हेल्पलाइन की मदद की व्यवस्था करनी चाहिए रिज़र्व बैंक द्वारा एवं विभिन्न माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में दिए गए दिशा निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना ।
फ़ैम के सदस्यों ने आशा व्यक्त की है कि जनहित में लघु कारोबारी और आमजन कोरोना महामारी के कारण अपना कारोबार या आय के स्त्रोत खो बैठे हैं, उन्हें बैंक एवं वित्तीय संस्थाओ द्वारा नियुक्त वसूली एजेंट के प्रकोप के बचाने हेतु सरकार उपरोक्त बातों पर यथाशीघ्र एक विस्तृत नियमावली एवं नीति तैयार करे और इस संकट कालीन समय में कुछ राहत प्रदान करे ।

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