October 24, 2020

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आईएसआईएस हमलों और धमकियों से डरे अफगानिस्तान के हिंदू-सिख

हिंदू-‎‎सिख समुदाय ने कहा, य‎दि सरकार से संरक्षण नहीं ‎मिला तो करना पड़ सकता है पलायन

काबुल:- अफगानिस्तान के हिंदू और सिख समुदाय आईएसआईएस आतंकी संगठन के हमले और धमकियों से डरकर देश छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। इस देश में कभी हिंदू और सिख समुदाय की आबादी 2,50,000 से ज्यादा थी जो इस समय घटकर मात्र 700 रह गई है। मुस्लिम बाहुल्य इस देश में सिखों और हिदुओं के साथ होने वाले गहरे पक्षपात के कारण इनके सदस्यों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। हिंदू और सिख समुदाय के लोगों का कहना है कि यदि उन्हें सरकार से पर्याप्त सरंक्षण नहीं मिलता है तो आईएस के हमलों के कारण उन्हें पलायन करना पड़ सकता है। डर के कारण अपना पूरा नाम नहीं बताने वाले एक अल्पसंख्यक ने कहा कि हम अब यहां और रुकने में समर्थ नहीं हैं। उसने बताया कि मार्च में उनके समुदाय के मंदिर पर हुए हमले में उनके सात रिश्तेदार मारे गए थे। इस हमले में 25 सिखों की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि अपनी मातृभूमि को छोड़कर जाना उतना ही मुश्किल हैद्व जैसे अपनी मां को छोड़कर जाना। इसके बावजूद वे उस हिंदू-सिख समूह का हिस्सा रहे जो कि पिछले महीने भारत गया था। वैसे तो सिख और हिंदू दो अलग-अलग धर्म हैं लेकिन फिर भी अफगानिस्तान में इनकी संख्या बेहद कम होते जाने डर के कारण ये सभी एक छोटे से मंदिर में एकत्र होकर ही अपने-अपने धर्म के अनुसार उपासना करते हैं। एक अल्पसंख्यक ने आरोप लगाया कि इस रूढ़िवादी मुस्लिम देश में उनके समुदाय को व्यापक भेदभाव का सामना करना पड़ा है और लगभग हर सरकार अपने तरीके से उन्हें धमकाती रही हैं। इन समुदाय के तमाम लोगों के घरों को जब्त किए जाने के चलते ऐसे लोग पूरी तरह से देश छोड़कर जाने को मजबूर हैं। अफगान में 1992-96 के दौरान प्रतिद्वंदी समूहों के बीच चली लड़ाई के दौरान भी काबुल में हिंदूओं के मंदिर तबाह कर दिए गए। उस दौरान भी बहुत सारे हिंदू और सिख अफगानियों को देश छोड़कर जाना पड़ा था।

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