October 30, 2020

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देश को 7 साल बाद खुशखबरी, कपास की बंपर पैदावार की संभावना

नई दिल्ली:- देश में 7 साल बाद कपास किसानों के लिए खुशखबरी की खबर आ रही है। भारत में नए कपास सीजन साल 2020-21 के लिए किसानों ने कैश पेमेंट खरीफ फसल व्हाइट गोल्ड की बुआई अब तक करीब 2.11 फीसदी बढ़कर 130.37 लाख हैक्टेयर में कर ली है जबकि पिछले साल इस समय तक लगभग 127.67 लाख हैक्टेयर भूमि में व्हाइट गोल्ड की बुआई की गई थी। सूत्रों के अनुसार देश में इस साल 7 साल बाद फिर से बंपर पैदावार होने की संभावना है। इस साल व्हाइट गोल्ड का बुआई क्षेत्र बढऩे के साथ-साथ खेतों में फसल सैंतें मार रही हैं। मौसम आगे अनुकूल रहा तो देश में व्हाइट गोल्ड की पैदावार का विश्व स्तरीय रिकॉर्ड पैदावार आंकड़ा स्थापित होगा। इस साल व्हाइट गोल्ड की पैदावार के अनुमान अलग-अलग आ रहे हैं। इसके अनुसार पैदावार 4, 4.20 व 4.25 करोड़ गांठें आंकड़े बाजार में आ रहे हैं। भारत में 7 साल बाद एक बार फिर से व्हाइट गोल्ड की बंपर पैदावार होने की बड़ी उम्मीद जताई जा रही है। पिछले 7 साल में देश में व्हाइट गोल्ड की पैदावार इस प्रकार रही। कपास सीजन साल 2013-14 में 3.98 करोड़ गांठों की पैदावार रही जबकि 2014-15 में 3.86 करोड़, 2015-16 में 3.32 करोड़, 2016-17 में 3.45 करोड़, 2017-18 में 3.70 करोड़, 2018-19 में 3.30 करोड़ व साल 2019-20 में 3.68 करोड़ गांठों की पैदावार रहने की सूचना है। बाजार जानकार सूत्रों की मानें तो चालू नए कपास सीजन साल 2020-21 में कपड़ा मंत्रालय के उपक्रम भारतीय कपास निगम लिमिटेड (सीसीआई) का व्हाइट गोल्ड खरीद पर दबदबा रहने की संभावना जताई जा रही है। सीसीआई ने इस साल देश भर में करीब 1.12 करोड़ गांठों का व्हाइट गोल्ड न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा है। केंद्र सरकार ने नए कपास सीजन साल 2020-21 के लिए व्हाइट गोल्ड का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,515 और 5,825 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। यह एमएसपी व्हाइट गोल्ड की क्वालिटी पर निर्भर करेगा कि उसकी एमएम लंबाई क्या है। सूत्रों के अनुसार देश के किसान नए कृषि अध्यादेश का जोरदार विरोध कर रहे हैं जिसको विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा समर्थन दिया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार किसानों को खुश करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है और अब सरकार कपड़ा मंत्रालय के उपक्रम भारतीय कपास निगम लिमिटेड द्वारा किसानों की कैश पेमेंट फसल व्हाइट गोल्ड 2 से 2.25 करोड़ गांठ खरीदने की बात बाजार में आई है जिससे सीसीआई का व्हाइट गोल्ड मंडियों पर दबदबा रहेगा क्योंकि कपास जिनिंग कारखाने वाले सीसीआई के बराबर किसानों को व्हाइट गोल्ड का भाव नहीं दे सकते। इसका मुख्य कारण है कि रुई के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य पर व्हाइट गोल्ड खरीदने से कपास जिनरों को मोटा नुकसान है। आखिरकार व्यापारी कब तक नुकसान उठाएगा, अधिकतर कपास जिनर कारखानेदार अपनी मिलें सीसीआई को ठेके (बिलाई) पर देंगे जिसके लिए उन्होंने सीसीआई को लिखित रूप में दे दिया है।

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