October 30, 2020

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केंद्र ने हथियारों के लिए मंजूर किये 2,290 करोड़ – सेना व वायु सेना का संचार तंत्र मजबूत करने के लिए 540 करोड़ से होगी रिसीवर सेट की खरीद

सेना के लिए 780 करोड़ रुपये से खरीदी जाएंगी 72 हजार अमेरिकी असॉल्ट राइफल्स

नेवी और एयरफोर्स के लिए 970 करोड़ से खरीदे जायेंगे स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन

नई दिल्ली:- पूर्वी लद्दाख में चीन से सैन्य टकराव के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को भारतीय सेनाओं की जरूरत को देखते हुए हथियारों की खरीद के लिए 2,290 करोड़ रुपये मंजूर कर दिए। इसमें भारतीय सेना के लिए 780 करोड़ रुपये से अमेरिकी 72 हजार असॉल्ट राइफल्स खरीदी जानी है। 540 करोड़ रुपये की लागत से एचएफ ट्रांस-रिसीवर सेट खरीदा जाना है, जिससे सेना और वायु सेना का संचार तंत्र मजबूत होगा। इसके अलावा 970 करोड़ से स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियारों की स्वदेशी खरीद की जाएगी, जिससे नेवी और एयरफोर्स की अग्नि शक्ति में इजाफा होगा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक हुई, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों के लिए 2,290 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। इनमें घरेलू उद्योग के साथ-साथ विदेशी विक्रेताओं से हथियारों की खरीद शामिल है। इसमें सबसे बड़ी खरीद 780 करोड़ रुपये से अमेरिकी कम्पनी ‘सिग सॉयर’ से दूसरी खेप में 72 हजार सिग-716 असॉल्ट रायफलों की होनी है। भारतीय सेना ने फरवरी, 2020 में अमेरिकी कम्पनी ‘सिग सॉयर’ से आधा किमी. दूरी तक मार करने की क्षमता वाली 72 हजार 400 असॉल्ट रायफलें खरीदी थीं। पहली खेप में मिलीं असॉल्ट राइफलों का इस्तेमाल भारतीय सेना अपने आतंकवाद-रोधी अभियानों में कर रही है। यह 7.62 गुणा 51 मिमी. कैलिबर की बंदूकें हैं, जो 647 करोड़ रुपये के फास्ट-ट्रैक प्रोक्योरमेंट (एफटीपी) सौदे के तहत खरीदी गई थीं। इसी साल मार्च महीने में भारत ने चीन और पाकिस्तान के साथ सीमाओं पर तैनात अपने अग्रिम पंक्ति के सैनिकों के लिए 16 हजार 479 इजरायली लाइट मशीन गन (एलएमजी) खरीदने के लिए 880 करोड़ रुपये का सौदा किया था। 7.62 गुणा 51 मिमी की इन एलएमजी की संख्या सीमित होने और फरवरी में खरीदी गई 72 हजार 400 असॉल्ट रायफलों से 15 लाख की क्षमता वाले भारतीय सशस्त्र बलों की आंशिक जरूरतें ही पूूूरी हो पा रही थीं। नई अमेरिकी असॉल्ट रायफल्स इस समय सैनिकों के हाथों में मौजूद इंसास रायफलों का स्थान लेंगी। इन इंसास रायफलों का निर्माण स्थानीय रूप से आयुध कारखानों बोर्ड ने किया था। यानी अमेरिकी असॉल्ट रायफलों का इस्तेमाल आतंकवाद निरोधी अभियानों में और चीन-पाकिस्तान की सीमा पर अग्रिम पंक्ति के सैनिकों द्वारा किया जाएगा, जबकि शेष सेनाओं को एके-203 रायफलें दी जाएंगी जिनका उत्पादन अमेठी आयुध कारखाने में भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से किया जाना है।

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