October 24, 2020

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बॉम्‍बे हाईकोर्ट का आदेश- देह व्‍यापार अपराध नहीं, किसी भी महिला को अपना पेशा चुनने का पूरा अधिकार

नई दिल्‍ली:- देह व्‍यापार में शामिल होने के आरोप में पकड़ी गईं तीन युवतियों से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने तीनों को सुधार गृह से रिहा करने के आदेश दिए है। हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा क‍ि किसी भी महिला को अपना पेशा चुनने पूरा अधिकार है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि किसी भी वयस्‍क महिला को उसकी सहमति के बिना लंबे समय तक सुधार गृह में नहीं रखा जा सकता है। बॉम्‍बे हाईकोर्ट के जस्टिस पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि इममॉरल ट्रैफिकिंग कानून 1956 का मकसद देह व्यापार को खत्म करना नहीं है। इस कानून के अंतर्गत ऐसा कोई भी प्रावधान उपलब्‍ध नहीं है, जो वेश्यावृत्ति को अपराध मानता हो या देह व्यापार से जुडे़ हुए को दंडित करता हो। इस कानून के तहत सिर्फ व्यवसायिक मकसद के लिए यौन शोषण करने और सार्वजनिक जगह पर अशोभनीय कार्य करने को दंडित माना गया है। उन्होंने आगे कहा कि संविधान के तहत प्रत्येक व्यक्ति को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने और अपनी पसंद की जगह पर रहने का पूरा अधिकार है। इस दौरान जस्टिस ने वेश्यावृत्ति से छुड़ाई गई युवतियों को सुधारगृह से छोड़ने का निर्देश दिया। सितंबर 2019 को मुंबई पुलिस की समाज सेवा शाखा ने तीनों युवतियों को छुड़ाया था। उन्‍हें सुधारगृह में भेज दिया गया था। निचली अदालत ने एक सुनवाई के दौरान पाया था कि ये तीनों युवतियां उस समुदाय से हैं, जहां देह व्यापार उनकी पुरानी परंपरा है। इसके बाद उन्‍हें ट्रेनिंग के लिए यूपी भेजने का निर्देश दिया था। निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ तीनों युवतियां हाईकोर्ट पहुंची थीं। जस्टिस ने निचली अदालत के दोनों आदेश को निरस्त कर दिया और तीनों युवतियों को सुधारगृह से मुक्त करने का निर्देश दिया।

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