October 21, 2020

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अकाली दल से नाता टूटने के बाद अब पंजाब में चुनावी संग्राम में अकेले ही विधानसभा चुनावों की रणनीति बनाने में जुटी भाजपा

चंडीगढ़:- बीजेपी ने पिछले 10 दिनों में कृषि बिल पर नाराज अपने पुराने साथी शिरोमणि अकाली दल से फिर संपर्क करने की कोई कोशिश नहीं की है। इसकी जगह बीजेपी ने एक कड़ा फैसला लिया है, पंजाब में अकेले ही आगे बढ़ने का। अकाली दल से गठजोड़ टूटने के बाद भाजपा ने पंजाब में अकेले ही वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। रविवार को चंडीगढ़ में पार्टी की पंजाब इकाई की कोर कमेटी की आपात बैठक प्रांतीय अध्यक्ष अश्वनी शर्मा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में राज्य के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं को सक्रिय होने के लिए कहा गया। इसकी पुष्टि कोर कमेटी के सदस्य मदन मोहन मित्तल ने की। दरअसल, बीजेपी पंजाब में शहरी मतदाताओं वाली पार्टी रही है, केवल 7 से 8 जिलों में ही उसका असर है। इसके अलावा नवजोत सिंह सिद्धू के जाने के बाद उसके पास कोई बड़ा सिख नेता भी नहीं बचा। साल 2019 में उसे 10 प्रतिशत वोट मिले थे और पंजाब से केवल दो एमपी और एमएलए ही जीत पाए थे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि साल 2022 के चुनावों से पहले बीजेपी छोटे दलों की ओर देख रही है, इनमें शिरोमणि अकाली दल से अलग हुए सुखदेव सिंह ढींढसा का गुट शामिल है। हालांकि ढींढसा का कहना है कि वह बीजेपी की जगह किसी क्षेत्रीय दल का हाथ पकड़ना बेहतर समझेंगे, उनकी प्राथमिका किसानों की समस्‍याएं दूर करना होगा। वहीं, बीजेपी के पंजाब अध्‍यक्ष अ‍श्‍वनी शर्मा के मुताबिक, शिरोमणि अकाली दल का यह कहना गलत है बीजेपी किसान विरोधी है। किसानों को न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य के बारे में कही जा रही अफवाहों पर भरोसा नहीं करना चाहिए क्‍योंकि पंजाब में न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (एमएसपी) पर अनाजों की खरीद शनिवार से शुरू हो चुकी है। अकाली दल के साथ गठजोड़ में भाजपा पंजाब में 117 सीटों में से 23 पर चुनाव लड़ती थी। पंजाब भाजपा की कोर ग्रुप की बैठक में प्रांतीय अध्यक्ष अश्वनी शर्मा के अतिरिक्त राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, मदन मोहन मित्तल, अविनाश राय खन्ना, श्वेत मलिक, विजय सांपला, ब्रिज लाल रिनवा, मनोरंजन कालिया, प्रो रजिन्दर भण्डारी, तीक्ष्ण सूद, जीवन गुप्ता, डॉ सुभाष शर्मा और मलविंदर सिंह कंग भी शामिल थे। कोर कमेटी की बैठक में शर्मा ने कहा कि पंजाब भाजपा का मत है कि शिरोमणि अकाली दल का एनडीए से अलग होना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा ने हमेशा एनडीए के घटक दलों का सम्मान किया है। पंजाब में भी भाजपा ने हमेशा पंजाब की शांति व भाईचारे के लिए अकाली दल के साथ गठबंधन धर्म निभाया है। अब जिन मुद्दों को लेकर अकाली दल ने नाता तोड़ा है, भाजपा उन पर अकाली दल से सहमत नहीं है। भाजपा पंजाब का अब दृढ़ मत है कि मोदी सरकार द्वारा पारित किए गए कृषि क़ानून किसानों के हित मे हैं। भाजपा ने इन क़ानूनों के बारे में लगातार शिरोमणि अकाली दल के साथ विचार-विमर्श किया है। पिछले तीन महीनों के दौरान इन क़ानूनों के बारे में जो भी सवाल अकाली दल ने उठाए, केंद्र सरकार ने उन सब के जवाब दिए। भाजपा पंजाब का मानना है कि अब आखिरी मौके पर अकाली दल का विरोध करना राजनीतिक मकसद सिद्ध करने के लिए है। उन्होंने कहा कहा कि मोदी सरकार द्वारा किसानों के हित में पिछले 6 वर्ष में किए गए कार्य बेमिसाल हैं। स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू करते हुए किसानों को लागत मूल्य से डेढ़ गुना एमएसपी देना, सरकारी खरीद में हर वर्ष रिकॉर्ड बढ़ोतरी, 11 करोड़ किसानों के खातों में सीधे तौर पर हर वर्ष 6000 रुपए भेजना, नीम कोटेड यूरिया की सप्लाई सुनिश्चित करना, किसान क्रेडिट कार्ड की व्यवस्था को मजबूत बनाना तथा गांवों के इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए डेढ़ लाख करोड़ रुपए का फंड जारी करना सहित अनेकों कदम उठाए हैं । अश्वनी शर्मा ने कहा कि यह दुख की बात है कि अकाली दल आज पंजाब मे गुमराहपूर्ण प्रचार कर रही कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी के साथ खड़ी दिखाई दे रही है। पंजाब भाजपा पंजाब के किसानों को विश्वास दिलाती है कि एमएसपी थी, एमएसपी है तथा एमएसपी रहेगी। पंजाब भाजपा किसानों तथा किसान संगठनों से अपील करती है कि वह आंदोलन का रास्ता छोड़ कर बातचीत के लिए आगे आएं। कोर कमेटी की बैठक के बाद चुनिंदा पत्रकारों से बातचीत में पार्टी के वरिष्ठ नेता मदन मोहन मित्तल ने अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर निशाना साधा। प्रकाश सिंह बादल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज पार्टी बच्चों के हाथों में चली गई है और बच्चा पार्टी के सलाहकार कौन हैं यह भी उन्हें नहीं पता।

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