October 29, 2020

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दुर्लभ पैंगोलिन की तस्करी का हुआ खुलासा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिलते है लाखों-करोड़ दुर्लभ वज्रकीट को किया गया बरामद

रांची :- झारखंड में अवैध अफीम, ब्राउन शुगर ,गांजा और देशी-विदेशी शराब के बाद दुर्लभ वज्रकीट (पैंगोलिन) की तस्करी का भी खुलासा हुआ है। इस दुर्लभ वज्रकीट की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों करोड़ों में होती है।
रांची के तमाड़ थाना से इस दुलर्भ वज्रकीट को बरामद किया गया है। इस संबंध में सहायक वन पदाधिकारी अर्जुन बड़ाईक ने बताया कि जब लोग घने वन क्षेत्र में रहने वाले दुलर्भ वज्रकीट को पकड़ कर पैसा कमाने के लिए अपने पास रखते है और वन विभाग को कोई सूचना नहीं देते है, तो इसका मतलब साफ है कि कहीं न कहीं इनका संपर्क तस्करों से रहता है, या ये राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय वज्रकीट तस्करों से संपर्क की कोशिश में रहते है। उन्होंने बताया कि सुबह में पांच बजे उन्हें यह सूचना मिली कि कुछ ग्रामीणों ने किसी जंगली जानवर को पकड़ कर रखा है, इस सूचना पर पुलिस के साथ मौके पर पहुंचा गया, तो वज्रकीट बरामद किया गया है और इसे पकड़ कर रखने वाले चार ग्रामीणों को हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने कहा कि वन्य प्राणी एक्ट के तहत शिड्यूल-1 की सूची में रखे गये पैंगोलिन या किसी भी जंगली जानवरों का शिकार या उन्हें पकड़ना या अपने पास रखने पर विभिन्न धाराओं के तहत सजा का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी दिसंबर-जनवरी महीने में एक वज्रकीट को बरामद किया गया था। वन विभाग की ओर से जब्त किये गये पैंगोलिन को फिर से जंगल में छोड़ दिया जाता है।
जानकारों के मुताबिक चीन और वियतनाम में दवाएं बनाने और मांस के लिए इनकी मांग बहुत है। पैंगोलिन की त्वचा का ऊपरी शल्क केरेंटिन से बनी होती है। चीन में चिकित्सकों का मानना है कि बहुत सी बीमारियों के इलाज में इसकी मदद ली जा सकती है। साथ ही पैंगोलिन जमीन खोदते हैं, तो शरीर में होने वाले ब्लॉकेज को खोलने में इनकी मदद ली जा सकती है। जुलोजी के जानकारों का कहना है कि वज्रशल्क या पैंगोलिन फोंलिडोटा गण का एक स्तनधारी प्राणा है, इसके शरीर पर केराटिन के बने शल्क (स्केल) नुमा संरचना होती है, जिससे यह अन्य प्राणियों से अपनी रक्ष्ज्ञा करता है। पैंगोलिन ऐसे शल्कों वाला अकेला ज्ञात स्तनधारी है। यह एशिया के अलावा अफ्रीमा में भी पाया जाता है।

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