October 21, 2020

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स्वास्थ्य सेवा की बदहाली, खाद्य सुरक्षा और मनरेगा के मुद्दे पर होगा आंदोलन – माकपा

1 से 15 अक्टूबर तक अभियान चलाकर प्रखंड मुख्यालयों पर होगा धरना प्रदर्शन

रांची:- माकपा की आज हुई बैठक में कहा गया है कि राज्य मे कोरोना महामारी के संक्रमण में बढ़ोतरी हुयी है। लेकिन दूसरी ओर रिकवरी की दर में भी सुधार हुआ है। राज्य सरकार की पहल पर टेस्टिंग का दायरा बढा है। इसके अलावा निजी टेस्ट लैब मे जांच का शुल्क कम करने की घोषणा राज्य सरकार ने की है। लेकिन प्राइवेट अस्पतालों द्वारा मरीजों से इलाज के नाम पर भारी राशि वसुले जाने का सिलसिला जारी है और राज्य सरकार इस पर अंकुश लगाने में सफल नहीं हो पा रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रकाश विप्लव ने कहा कि सरकारी अस्पतालों की भी स्थिति ठीक नही है। कोरोना के गंभीर मरीजों को भी बेड नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा दुसरी बीमारी से ग्रस्त लोगों के इलाज मे भारी कठिनाइयों का सामना करना पड रहा है। सरकार को स्वास्थ्य सेवा और इलाज की सुविधा के सवाल पर ठोस हस्तक्षेप करना चाहिए। कोरोना से बचाव के लिए आम लोगों में जागरूकता अभियान चलाए जाने के प्रति भी सरकार की गंभीरता परिलक्षित नहीं हो रही है। इसका कारण है कि सरकार अपनी प्रशासनिक मशीनरी के भरोसे ही इससे निपटने मे लगी है। बड़ी तादाद मे वालंटियर रिक्रूट कर उन्हें जागरूकता अभियान में लगाने की कोई ठोस योजना नही है । इस अवधि मे ही राज्य विधानसभा का सत्र 18 सितंबर से शुरू होकर 23 सितंबर को संपन्न हुआ। इस सत्र मे सरकार ने फ्लोर से 8 विधेयक पारित कराए। सत्र का अंतिम दिन कोरोना पर चर्चा के लिए निर्धारित किए जाने के बावजूद मुख्य विपक्ष भाजपा इस मुद्दे को भी सांप्रदायिक रंग देने के प्रयास मे लगी रही।यह आकलन आज डिजिटल मंच पर हुयी पार्टी की झारखंड राज्य कमिटी की बैठक मे आया। राज्य कमिटी ने अन्य ज्वलंत मुद्दों जैसे हाई कोर्ट का निर्णय जिसमें पिछले दिनों हुई नियुक्तियों को रद्द करने, झारखंड लैंड म्यूटेशन विधेयक, आदिवासी संगठनों द्वारा जनगणना प्रपत्र मे उन्हें अलग धर्म के कालम मे जोड़ने और कोल इंडिया बोर्ड द्वारा जमीन के बदले नियोजन नही देकर केवल मुआवजा देने की घोषणा पर चर्चा की। राज्य कमिटी ने झारखंड के स्थानीय मुद्दों जिसमें स्वास्थ्य सेवा, खाद्य सुरक्षा और मनरेगा के सवाल पर विचार विमर्श कर एक पखवाड़े तक प्रचार अभियान चलाकर स्वास्थ्य मंत्रालय के गाइड लाइन का पालन करते हुए प्रखंडों पर प्रदर्शन किए जाने का निर्णय लिया गया।

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