October 29, 2020

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किसानो को सुरक्षा प्रदान करने वाली कवच कमजोर -अभय सिंह

राजद का केंद्र सरकार के खिलाफ धरना

शुक्रवार को राष्ट्रीय जनता दल ने बीजेपी सरकार के किसान बिरोधी बिल के खिलाफ हल्ला बोल दिया और राजभवन के सामने धरना दिया। पार्टी कार्यकर्ताओ ने कहा की बीजेपी सरकार लगातार गरीब और किसान विरोधी फैसले ले रही है. सदन मे अपने संख्याबल का गलत इस्तमाल करते हुए एकतरफा फैसले ले रही है।
इस मौक़े पर प्रदेश अध्यक्ष अभय कुमार सिंह ने कहा की 2022 तक आय दुगना करने की बात करने वाली सरकार 2020 में ही किसानों को सड़क पर पटकने की पूरी तैयारी कर चुकी है। कहाँ केंद्र सरकार बात करती थी कि कुल लागत का 50% जोड़कर MSP किसानों को दिया जाएगा और कहाँ इतनी धूर्तता से अब MSP ही खत्म किया जा रहा है! इतना बड़ा झूठ मोदी जी ने 2014 के चुनाव प्रचार के वक़्त अन्नदाता किसानों से क्यों बोला।
यह अध्यादेश कहता है कि बड़े कारोबारी सीधे किसानों से उपज खरीद कर सकेंगे, लेकिन ये यह नहीं बताया कि जिन किसानों के पास मोल-भाव करने की क्षमता नहीं है, वे इसका लाभ कैसे उठाऐंगे! सरकार एक राष्ट्र, एक मार्केट बनाने की बात कर रही है, लेकिन उसे ये नहीं पता कि जो किसान अपने जिले में अपनी फसल नहीं बेच पाता है, वह राज्य या दूसरे जिले में कैसे बेच पायेगा। क्या किसानों के पास इतने साधन हैं कि वह दूर मंडियों में अपने सामान को ले जाने का खर्चा उठा पायेगा।
वही युवा के प्रदेश अध्यक्ष रंजन कुमार ने कहा की इस कानून के लागू होने पर अब पशुधन और बाज़ार समितियाँ किसी इलाक़े तक सीमित नहीं रहेंगी. अगर किसान अपना उत्पाद मंडी में बेचने जाएगा, तो दूसरी जगहों से भी लोग आकर उस मंडी में अपना माल डाल देंगे और किसान को उनकी निर्धारित रक़म नहीं मिल पाएगी और छोटे किसानों को सबसे ज्यादा मार पड़ेगी।जबकि विवाद होने पर सुलझाने के लिए 30 दिन के अंदर समझौता मंडल में जाना होगा। वहां न सुलझा तो धारा 13 के अनुसार एसडीएम के यहां मुकदमा करना होगा। एसडीएम के आदेश की अपील जिला अधिकारी के यहां होगी और जीतने पर किसानें को भुगतान करने का आदेश दिया जाएगा। देश के 85 फीसदी किसान के पास दो-तीन एकड़ जोत की जमीन है। विवाद होने पर उनकी पूरी पूंजी वकील करने और ऑफिसों के चक्कर काटने में ही खर्च हो जाएगी। एसे मे क्या ग़रीब किसान इतनी परेशानी ले पायेगा।
वही प्रदेश महा सचिव आशुतोष रंजन ने कहा की हमारे देश में 85% लघु किसान हैं, झारखण्ड में तो छोटी और मझली जोत के किसान और भी अधिक है। किसानों के पास लंबे समय तक भंडारण की व्यवस्था नहीं होती है यानी यह अध्यादेश बड़ी कम्पनियों द्वारा कृषि उत्पादों की कालाबाज़ारी के लिए लाया गया है। कम्पनियां और सुपर मार्केट अपने बड़े-बड़े गोदामों में कृषि उत्पादों का भंडारण करेंगे और बाद में ऊंचे दामों पर ग्राहकों को बेचेंगे। इस बदलाव से कालाबाजारी घटेगी नहीं बल्की बढ़ेगी और जमाखोरी बढ़ेगी। वही जो कंपनी या व्यक्ति ठेके पर कृषि उत्पाद लेगा, उसे प्राकृतिक आपदा या कृषि में हुआ नुक़सान से कोई लेना देना नहीं होगा. इसका ख़मियाज़ा सिर्फ़ किसान को उठाना पड़ेगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम में पहले किसानों पर खाद्य सामग्री को एक जगह जमा कर रखने पर कोई पाबंदी नहीं थी। ये पाबंदी सिर्फ़ कृषि उत्पाद से जुडी व्यावसायिक कंपनियों पर ही थी. अब संशोधन के बाद जमाख़ोरी को रोकने की कोई व्यवस्था नहीं रह जाएगी, जिससे बड़े पूँजीपतियों को तो फ़ायदा होगा, लेकिन किसानों को इसका नुक़सान झेलना पड़ेगा। इससे बाहरी या प्राइवेट कारोबारियों को फायदा पहुंचेगा। इस तरह के कानून की मदद से छोटी – छोटी मंडिया पूरी तरह खत्म हो जायेंगी. बड़ी कंपनियां की मनमानी बढ़ेगी और छोटे व्यापारी संकट में आ जायेंगे. कंपनियां किसानों की जमीन पर नियंत्रण करने लगेंगी जिससे कालाबाजरी बढ़ेगी। किसान पूरी तरह से कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के दायरे में आ जायेगा। इससे किसान और उसकी उपज पर प्राइवेट कंपनियों का कब्जा हो जाएगा और सारा फायदा बड़ी कंपनियों को मिलेगा कृषि उत्पाद मार्केट कानूनों (राज्य APMC Act) किसानों को फ्री व्यापार की सुविधा मिलती है. इससे मंडियां खत्म हो जायेगी।अध्यादेश से मंडी एक्ट केवल मंडी तक ही सीमित कर दिया गया है और मंडी में खरीद-फरोख्त पर शुल्क लगेगा जबकि बाहर बेचने- खरीदने पर इससे छूट मिलेगी।
इसलिए साफ कहना है की इस तानाशाह सरकार को आम जनता की कोई फ़िक्र नहीं है, मैं सरकार से मांग करता हूँ की इस किसान विरोधी कानून को संसोधित करें।
वही धरना मे पार्टी के श्याम दास सिंह, पिंकी यादव,मोहम्मद इस्लाम, गौरीशंकर यादव, कमलेश यादव, सतरूपा पाण्डेय, अनीता यादव, गायत्री देवी, अर्जुन यादव, ज़फ़ीर खान, सैलेन्द्र शर्मा, इम्तियाज़ हुसैन वारसी, कैसर जहा वारसी, सुरेंद्र यादव, मदन यादव, अमित जैसवाल, विजय यादव, अंजल किशोर, रानी कुमारी, अनिल कुमार शर्मा, मुकुंद कुमार, ओम प्रकाश, प्रिंयका कुमारी, पुष्पा यादव, फिरोज अंसारी, धर्मेंद्र महतो आदि पार्टी के कार्यकर्त्ता शामिल हुए।

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