October 24, 2020

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आत्मनिर्भर अभियान ने श्रमिकों को दिखाई नई राह, नवप्रवर्तन की ओर बढ़ रहा बिहार

बेगूसराय:- आजादी के बाद की पहली सरकार ने बेगूसराय को बिहार की औद्योगिक राजधानी बनाया था। लेकिन बाद की सरकारों की गलत नीति और कथित श्रमिक नेताओं के कारण बदहाल हुआ बेगूसराय एक बार फिर से ना केवल बिहार की औद्योगिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर है बल्कि यह देशभर में चर्चा का विषय बनने की नई कहानी गढ़ रहा है। 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार बनी तो बेगूसराय के बंद पड़े और बंद होने के कगार पर पहुंच चुके औद्योगिक संस्थानों को विटामिन मिलनी शुरू हुई। इसके बाद केंद्र सरकार ने बिहार सरकार के साथ मिलकर बेगूसराय की आधारभूत संरचना को मजबूत करने के साथ-साथ विकास की नई कहानी रचनी शुरू कर दी। प्रधानमंत्री के संकल्प से बेगूसराय में विकास को नई रफ्तार मिली है लेकिन बेगूसराय और बिहार सिर्फ इन्हीं योजना की बदौलत नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर मंत्र को आत्मसात कर नई औद्योगिक गतिविधि में तल्लीन है। कोरोना से उत्पन्न स्थिति के बाद श्रमिकों पर आत्मनिर्भरता का ऐसा असर पड़ा कि महज कुछ दिनों बाद अब बेगूसराय का बाजार साबुन, सैनिटाइजर, बैग, जूता, चप्पल, कपड़ा और नए डिजाइनों के फर्नीचर के लिए बाहरी शहर के भरोसे नहीं रहेगा। इन तमाम चीजों का निर्माण बेगूसराय में ही शुरू हो गया है। संभव है कि दीपावली के आसपास यहां मोबाइल कवर, सौर ऊर्जा प्लेट भी बनने लगे। सबकुछ ठीकठाक रहा तो विभिन्न शहरों से लौटे प्रवासी कामगार यहां एलईडी लाइट, प्लास्टिक और मिट्टी के आकर्षक खिलौने, फोटो फ्रेम तथा दीवार घड़ी का भी निर्माण कार्य शुरू कर देंगे। औद्योगिक नवप्रवर्तन योजना से क्लस्टर बनाकर तथा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन अभियान के माध्यम से बेगूसराय में छोटे-छोटे उद्योगों के कई समूह शुरू हो रहे हैं। दिल्ली से लौटे श्रमिकों की एक टीम के मेठ शिव शंकर महतों ने गुरुवार को बताया कि हाल के दशकों में बिहार में रोजगार की कमी हो गई। जिसके कारण बड़ी संख्या में रोज-रोज यहां के श्रमिक अपने परिवार के जीवन बसर के लिए दिल्ली, मुंबई जाते रहे। चुनाव के समय सभी राजनीतिक दल हम लोगों को ठगते रहे। शायद आजादी के बाद पहली बार कोई ऐसी सरकार बनी है जिसके बारे में सब लोग कह रहे हैं कि काम हो रहा है। गांव से भी रोज फोन जाता था कि शहर में कोरोना का खतरा है गांव आ जाओ, यहीं रोजी रोजगार करो। बाहर भी हम लोग दिहाड़ी मजदूरी करते थे, यहां भी बन रहे कारखानों में ठेकेदार के माध्यम से मजदूरी कर सकते हैं। लेकिन हम लोग अब मजदूरी नहीं करेंगे, अपना रोजगार करेंगे। उन्होंने बताया कि हम सब साथी दिल्ली में एक जगह रहते थे, लेकिन काम अलग-अलग जगहों पर करते थे। अब गांव में एक जगह और सब मिलकर स्वरोजगार करेंगे। अपने श्रम से परदेस को हमने बनाया, अब गांव को आत्मनिर्भर बनाएंगे। हम लोग 4-जी मोबाइल के कारण जागरूक हो गए हैं, सबकुछ देख रहे हैं, सुन रहे हैं, समझ रहे हैं। हम लोग अशिक्षित थे, लेकिन हमारे बच्चों ने पढ़ाई की है। वह हमें सहयोग करेंगे और हमारा समग्र विकास होगा तो अपना बिहार आत्मनिर्भर बनेगा। प्रधानमंत्री के अभियान के अनुसार देश भी आत्मनिर्भर बनेगा। लंबे समय बाद एक मौका आ रहा है जब चुनाव में वोट देंगे। जो विकास कर रहा है वही हम सबका विकास करेगा, उसी को चुनेंगे।

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