October 23, 2020

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चीन-नेपाल विवाद/ बैकफुट पर आई ओली सरकार, अतिक्रमण के खिलाफ विरोध में सड़कों पर उतरे लोग

काठमांडू:- भारत और चीन का सीमा विवाद अभी थमा नहीं था कि चीन कि चीन की विस्तारवाद की नापाक हरकत नेपाल में भी शुरू हो गया। रिपोर्ट्स की मानें तो चीन ने नेपाल की जमीन पर कब्जा कर लिया है। चीन के इस कब्जे के खिलाफ काठमांडू स्थित चीनी दूतावास के बाहर युवाओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए चीन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बताया जा रहा है कि लोग लगातार बैक ऑफ चाइना का नारा लगा रहे हैं। वहीं, चीन ने ऐसी रिपोर्टों को खारिज करते हुए कब्‍जे की घटना से इनकार किया है। नेपाल में चीनी दूतावास ने अतिक्रमण संबंधी रिपोर्टों का खंडन किया। उसने कहा कि इमारतें चीन की सीमा के अंदर बनाई गई हैं। चीन और नेपाल के बीच कोई भौगोलिक विवाद नहीं है। इधर, नेपाल के विदेश मंत्री ने भी सफाई देते हुए कहा है कि उनके देश का चीन के साथ कोई सीमा विवाद नहीं है और न ही चीन ने उनके देश की जमीन पर कब्जा किया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि देश के सर्वेक्षण विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में पाया गया है कि उक्त इमारतें नेपाली क्षेत्र में स्थित नहीं हैं। दरअसल, पिछले हफ्ते स्‍थानीय मीडिया रिपो‌र्टों में कहा गया था कि चीन ने तिब्बत से लगे हुमला जिले में नेपाली जमीन पर कथित रूप से नौ इमारतों का निर्माण कर लिया है। इन इमारतों के हुमला जिले के लंपचा बागर इलाके में बनाए जाने का दावा किया गया था। इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद नेपाल के लोगों में चीन को लेकर आक्रोश पैदा हो गया था। नेपाल के एक सिविल सोसायटी समूह ने बुधवार को हुमला जिले में चीन द्वारा कथित रूप से इमारतें बनाने के खिलाफ प्रदर्शन किया। समूह के कार्यकर्ताओं ने ‘नेपाल की जमीन वापस लौटाओ’ और ‘चीन का विस्तारवाद बंद करो’ जैसे नारे लगाए। काठमांडू में चीनी दूतावास के सामने भी विरोध प्रदर्शन हुए। अब ऐसी रिपोर्टें आई हैं कि नेपाल-चीन सीमा का निर्धारण करने वाला पिलर नंबर-11 ही गायब हो गया है। इन खबरों के सामने आने बाद नेपाल की केपी शर्मा ओली की सरकार पूरी तरह बैकफुट पर आ गई है।

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