October 25, 2020

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वे उच्च सदन की गरिमा के प्रति अपने दायित्व से बंधे हैं : सभापति

नई दिल्ली:- राज्यसभा के सभापति एम.वेंकैया नायडू ने कहा कि वे उच्च सदन, उसके नियमों, मानदंडों और गरिमा के प्रति अपने दायित्व से बंधे हैं। यद्यपि सदस्यों का निलंबन दुर्भाग्यपूर्ण फैसला था। सदन के नियमों में अपरिहार्य स्थिति में ऐसे निलंबन का प्रावधान है। राज्यसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करते हुए अपने समापन भाषण में नायडू ने कहा कि यद्यपि विरोध करना विपक्ष का हक है फिर भी प्रश्न यही है कि इस अधिकार का प्रयोग कैसे और किस पद्धति से किया जाना चाहिए?
उन्होंने कहा कि सदन ही प्रतिस्पर्धी विचारों और तर्कों को व्यक्त करने का सबसे सक्षम माध्यम है। लंबे समय तक किया बायकॉट सदस्यों को उस अवसर से ही वंचित कर देता है जिससे वे अपने विचारों को प्रभावी रूप से व्यक्त कर सकें। विपक्ष के नेता गुलाम नबी आज़ाद तथा अन्य सदस्यों द्वारा उन्हें लिखे गये उस पत्र जिसमें सदन से तीन श्रम कानूनों को पारित न करने का आग्रह किया गया है, उसका जिक्र करते हुए सभापति ने कहा कि पूर्व में भी ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जब सदन की पूर्व निर्धारित कार्यसूची पर विचार किया गया तथा कुछ सदस्यों के वॉकआउट या बायकॉट किये जाने के बावजूद भी बिलों को पारित किया गया। इस संदर्भ में उन्होंने 2013 के वित्त विधेयक तथा विनियोजन विधेयक का उदाहरण उद्धृत किया। श्री नायडू ने कहा कि यदि उस पत्र में ऐसा कोई भी संकेत होता कि वे लौट रहे हैं तथा विधेयक पर बहस को टाल दिया जाये, तो वे स्वयं सरकार से इस विषय पर बात करते, लेकिन पत्र में ऐसा कोई आश्वासन भी नहीं था। बल्कि उल्टे कुछ सदस्यों ने जो कुछ किया, उसे न्यायोचित ठहराने की ही कोशिश की। इसलिए उन्हें विधेयकों पर बहस के लिए अनुमति देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि यद्यपि सत्र के दौरान सदन की उत्पादकता संतोषजनक रही फिर भी कुछ ऐसे विषय हैं जो चिंताजनक हैं। हमें इन विषयों पर सम्मिलित रूप से चिंता और विचार करना चाहिए जिससे कि भविष्य में बदलाव लाया जा सके। सभापति ने कहा कि सदन के इतिहास में पहली बार उपसभापति को हटाने के लिए नोटिस दिया गया जो कि अंतत: अस्वीकार कर दिया गया क्योंकि इसके लिए आवश्यक 14 दिन की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि इससे उन सभी को ठेस पहुंची होगी जो इस सदन की गरिमा और मर्यादा के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने सदस्यों से अपील की है कि वे ध्यान रखें कि भविष्य में ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण व्यवहार की पुनरावृत्ति न हो।

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