October 21, 2020

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अपनी स्थापना के 100वें साल में दो फाड़ हुई शिरोमणि अकाली दल

बादल परिवार को झटका सुखदेव ढींडसा और अकाली टकसाली नेताओं ने मिलकर नई पार्टी का गठन किया

नई दिल्ली:- शिरोमणी अकाली दल ने इसी साल अपने 100 साल का सफर पूरा किया है।14 दिसंबर 1920 को शिरोमणि अकाली दल की स्थापना हुई थी, लेकिन पंजाब विधानसभा चुनाव से महज डेढ़ साल पहले पार्टी में दो फाड़ हो गया है।अकाली दल के राज्यसभा सदस्य सुखदेव ढींडसा और अकाली टकसाली नेताओं ने मिलकर नई पार्टी का गठन किया है,जिसका नाम शिरोमणि अकाली दल डेमोक्रेटिक रखा है।पहले ही किसानों की नाराजगी झेल रहे सुखबीर सिंह बादल के लिए ढींडसा नई मुसीबत बनकर सामने खड़े हो रहे हैं।पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींढसा शिरोमणि अकाली दल डेमोक्रेटिक नाम से इस हफ्ते के अंत तक क्षेत्रीय दल के रूप में रजिस्ट्रेशन की अर्जी निर्वाचन आयोग में लगाएंगे।उन्होंने पार्टी का संविधान बनाकर तैयार कर लिया है।ढींडसा ने अपने विरोधी खासकर ‘बादल परिवार’ को बड़ा झटका देने का कदम उठाया है। दरअसल,पंजाब में महज डेढ़ साल के बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। सुखदेव सिंह ने अपने समर्थकों के साथ शिरोमणि अकाली दल डेमोक्रिटिक का गठन कर बादल परिवार को चुनौती देने की कोशिश की है।ढींडसा 2022 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल को कितना राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकते हैं, यह तो आने वाला समय तय करेगा।लेकिन फिलहाल बादल परिवार को चिंता में डाल दिया है।ढींडसा का जनाधार पंजाब के मालवा इलाके में है, जहां करीब चार दर्जन से ज्यादा विधानसभा सीटें आती हैं। पंजाब की राजनीति में मालवा को सत्ता की धुरी कहा जाता है।पंजाब के ज्यादातर मुख्यमंत्री इसी इलाके के बने हैं।मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से लेकर पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल इसी मालवा के इलाके से आते हैं।सुखदेव सिंह ढींडसा भी मालवा के हैं।वहां मालवा के हर इलाके के गांव, कस्बे को अच्छी तरह से जानते और वहां की सियासी नब्ज को समझते हैं। बादल परिवार जिस मालवा के जरिए सत्ता हासिल करते रहे हैं, अब उसकी सियासी जमीन पर ढींडसा अपना राजनीतिक आधार खड़ा करने जा रहे हैं।सुखदेव सिंह ढींडसा के शिरोमणि अकाली दल डेमोक्रेटिक बनने के बाद मालवा के राजनीतिक समीकरण पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।इस इलाके से आने वाले अकाली दल के नेता और कार्यकर्ता ढींडसा का दामन थाम रहे हैं।सुखदेव सिंह ढींडसा अपनी मातृ पार्टी रही शिरोमणि अकाली दल की एक-एक खूबी और खामी से बखूबी वाकिफ हैं। इतना ही नहीं ढींडसा अकाली दल और बीजेपी के बीच समन्वयक का भी काम करते रहे हैं। वहीं, किसानों के मुद्दे पर जिस तरह से सुखबीर बादल ने बीजेपी को लेकर आक्रमक रुख अख्तियार कर उनकी पत्नी हरसिमरत कौर ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दिया है। इसके बाद ढींडसा बीजेपी के साथ भी नए समीकरण तलाश सकते हैं, क्योंकि ढींडसा कहते रहे हैं कि पंजाब के हितों के लिए वह किसी से भी हाथ मिलाने को तैयार हैं।

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