October 24, 2020

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कैग रिपोर्ट में हुआ खुलासा, राजस्व संग्रहण में आयी कमी

रांची:-  झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक के वर्ष 2017-18 के सामान्य, सामाजिक एवं आर्थिक प्रक्षेत्रों का प्रतिवेदन ,राजस्व क्षेत्र का प्रतिवेदन ,लेखा वित्त परीक्षा प्रतिवेदन और वर्ष 2018-19 के राज्य वित्त लेखा परीक्षक प्रतिवेदन को सभा पटल पर रखा गया। कैग रिपोर्ट में वर्ष 2017-18 में राज्य सरकार द्वारा सृजित कर राजस्व में 7.11प्रतिशत कमी और इसी अवधि में गैर-कर राजस्व में 46.63 प्रतिशत की वृद्धि होने की बात कहीं गई है। वहीं बिक्री, व्यापार कर, वाहनों पर कर और राज्य उत्पाद शुल्क की बकाया राजस्व 31 मार्च 2018 तक 6355.57 करोड़ थी, जिसमें से 1824.43करोड़ पांच वर्षां से अधिक समय से बकाया रहने की बात भी कहीं गई है। रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में 1494.39करोड़ बैंक खातों में 31 मार्च 2018 तक चयनित जिले में पड़े रहने और भूमि अर्जन से संबंधित धनराशि रखने के लिए अधिक बैंक खाता खोलने समेत कई गड़बड़ियां उजागर हुई है। सामान्य सामाजिक एवं आर्थिक प्रक्षेत्रों के लिए 31मार्च 2018 को समाप्त हुए वर्ष में पुलिस आधुनिकीकरण के लिए वर्ष 2013-18 के दौरान 52.25करोड़ का राज्यांश जारी नहीं करने तथा 4.22करोड़ का केंद्रांश का उपयोग नहीं करने, धीमी उपयोगिता के कारण 21.31करोड़ के केंद्रीय अनुदान के नुकसान, आधुनिक हथियारों की कमी में 28 प्रतिशत से 32 प्रतिशत की वृद्धि, पुलिस बटालियन में बीपी जैकेट की कमी से अभियान में हताहत होने का खतरा, बारूदी सुरंग के जोखिम के पुलिस वाहनों के लिए मानक लागू नहीं करने, संचार उपकरणों में 37 से 71प्रतिशत की कमी, आतंकवाद निरोधक प्रशिक्षण के लिए वैसे पुलिसकर्मियों का चयन करने, जो निर्धारित आयु सीमा से अधिक थे और इनमें से 35पुलिसकर्मी के अंतिम जांच परीक्षा में पास नहीं करने, जिला, क्षेत्र तथा राज्य स्तर पर फॉरेंसिंग व्यवस्था में मानकों के अनुरूप नहीं रहने, पुलिसकर्मियों के लिए आवासीय सुविधा का अभाव और नक्सली खतरे को रोकने के लिए केंद्रीय बलों पर निर्भरता को कम नहीं किया जा सका। राज्य वित्त लेखा परीक्षा प्रतिवेदन 2017-18 में यह अनुशंसा की गयी है कि वित्त विभाग को बजट तैयार करने के उपक्रम को तर्कसंगत बनाना चाहिए, ताकि बजट अनुमान और वास्तविक के बीच की खाई को पाटा जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रम सेस के रूप में 393.67 करोड़ संग्रहित किया गया, लेकिन श्रमिक कल्याण बोर्ड नहीं रहने से राशि खर्च नहीं हो सकी। यह भी बताया गया कि लोक निर्माण विभाग की 113 अपूर्ण परियोजनाओं में 1402करोड़ का व्यय किया गया, लेकिन काम पूरा नहीं होने से राज्य को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका।

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