October 27, 2020

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बक्सर से पटना तक के राजनितिक गलियारे में बड़ी उलटफेर का सबब बन गया है बिहार डीजीपी का इस्तीफा

बक्सर:- संभावना राजनीतिक पटल का एक अहम हिस्सा है। गत रविवार को बक्सर दौरे पर आये बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय की अपने मातहत अधिकारियों के साथ बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर जब समीक्षात्मक बैठके की जा रही थी , उसी दौरान स्थानीय परिसदन के प्रांगन में जदयू नेताओं की उपस्थिति लोगो को खटक रही थी और कयास के अनुरूप हुआ भी वही जब अधिकारियों के साथ बैठक खत्म कर डीजीपी ने एक बंद कमरे में जदयू जिलाध्यक्ष विध्याचल चौधरी से एक घंटे की गुप्तगू की। राजनीतिक जानकार इस गुप्तगू का सीधा निहितार्थ डीजीपी के होने वाले बिहार विधानसभा के चुनाव से जोड़ कर देख रहे थे। यह पहली बार नही हुआ 2014 लोक सभा चुनाव के दौरान भी पाण्डेय द्वारा इस्तीफा दिए जाने और चुनाव में जाने की घटना मुखर हुई थी पर तत्कालीन परिस्थिति वस यह कयास की बाते बन गई और उन्होंने चुनाव लड़ने से गुरेज कर लिया|पुनः 2019 के दौर में शराब बंदी को लेकर जिस तरह से डीजीपी के पद पर रहते हुए पाण्डेय ने जन जागरण अभियान चलाया था। उसका भी राजनीतिक निहितार्थ था जो पाण्डेय का राजनीतिक जीवन में प्रवेश करने की ओर इंगित कर रहा था। अब जब कि डीजीपी के द्वारा इस्तीफा दिया जा चुका है और महामहीम राज्यपाल की स्वीकृति भी मिल गई है। ऐसे में बीते रात से ही बक्सर की राजनितिक गलियारे में भूचाल की स्थिति है|सबसे विकट स्थिति भाजपा के सन्मुख है। बक्सर विधान सभा की जिस सीट पर भाजपा की दावेदारी पुख्ता मानी जा रही थी। अचानक उस सीट पर जदयू की द्वेदारी ने धर्म संकट की स्थिति पैदा कर दी है। खुद गत रविवार के दिन स्थानीय परिसदन में पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय के साथ बैठक खत्म कर जदयू जिला अध्यक्ष विध्याचल कुशवाहा ने स्पष्ट कहा था की कि इस बार विधानसभा चुनाव में हम बक्सर सीट पर अपनी दावेदारी करेंगे। इस सीट पर भाजपा विगत के चुनाव में हारती रही है|जिसका सीधा राजनीतिक निहितार्थ निकाला गया की जदयू के तरफ से बक्सर विधानसभा की सीट पर पूर्व डीजीपी पाण्डेय की पुख्ता दावेदारी होगी। राजनितिक जानकारों की माने तो बक्सर विधानसभा ब्राह्मण बहुल क्षेत्र है। यहा से भाजपा अनवरत ब्राम्हण प्रत्याशी को ही चुनावी समर में उतारते आई है |पहले अजय चौबे फिर डॉ सुखदा पाण्डेय पुनः प्रदीप दुबे इनमे डॉ सुखदा पाण्डेय को छोड़ किसी को विजयी हाथ नही लगी। इस बार अगर समीकरण बदलता है और सीट जदयू के पाले में जाती है तो पूर्व डीजीपी पाण्डेय बक्सर विधानसभा सीट के लिए ब्राम्हण प्रत्याशी होने से उपयुक्त उम्मीदवार है। राजनीतिक गलियारे में यह कहावत तेजी से मुखर है कि जदयू प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ट नरायन सिंह समेत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अति निकटतम लोगो में पूर्व डीजीपी पाण्डेय का नाम शुमार है। अपने बेदाग़ छवि व कर्मठता को लेकर पाण्डेय का हर जाति विशेष में पकड़ है ,विशेष कर राजपूत, भूमिहार और वैश्य जाती के लोगो के भीतर स्थानीय राजनितिक कयास यह भी है कि अगर बक्सर विधानसभा की सीट से किसी कारण वस बात नही बनती तो ब्रह्मपुर विधानसभा से ये चुनाव लड सकते है। इस बाबत भाजपा और जदयू दोनों ही पार्टिया बाहरी प्रत्याशी देने की जगह स्थानीय प्रत्याशी को ही तरजीह देगी और गुप्तेश्वर पाण्डेय जिसको फुल फिल भी कर रहे है। पूर्व डीजीपी पाण्डेय बक्सर इटाढ़ी थाने के गेरुवाबाँध गाँव के मूल निवासी है |जिसकी वजह से स्थानीय राजनीतिक पटल पर इनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। वक्त के गर्भ में बहुत सारी बाते अभी आनी बाकी है। राजनीतिक सूत्रों की माने तो डीजीपी के पद से इस्तीफा देना वह भी विधानसभा चुनाव के ऐन मौके पर यह पूरी राजनीतिक सेटिंग के बाद पूर्व डीजीपी पाण्डेय द्वारा उठाया गया कदम है। अब जब की पाण्डेय का बक्सर विधान सभा से चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा की भाजपा और जदयू की गलबहिया क्या होती है और सीट छोड़ने के एवज में भाजपा अपने रुष्ट लोगो को किस तरह मनाती है। वरना भीतर घात की सम्भावना तो बनी ही रहेगी। पूर्व डीजीपी बक्सर,ब्रह्मपुर के आलवे शाहपुर को भी पसंद कर सकते है। राज्य सरकार ने भी बिहार के नये डीजीपी के तौर पर एस के सिंघल को नया डीजीपी नियुक्त कर दिया है।

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