October 21, 2020

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नयी शिक्षा नीति में 5प्लस 3प्लस 3प्लस 4 का प्रावधान-राज्यपाल

साइंस के साथ आर्टस विषय को भी रख पाएंगे विद्याथी

रांची:- राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि वर्तमान स्कूली पाठ्यक्रम में जहां अभी 10 प्लस टू व्यवस्था है, वहीं नयी शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत 5 प्लस 3 प्लस 3 प्लस 4 का प्रावधान किया गया है। इसका मतलब है कि प्राइमरी से दूसरी कक्षा तक एक हिस्सा फाउण्डेशन स्टोन होगा। फिर तीसरी से पांचवीं तक दूसरा हिस्सा प्रीपेटोरी स्टेज, छठी से आठवीं तक का तीसरा हिस्सा मिडिल स्टेज और 9वीं से 12वीं तक आखिरी हिस्सा सेकेंडरी स्टेज होगा। उन्होंने कहा कि क्लास 9 से 12 तक की पढ़ाई दो स्टेज में होगी, जिसमें विषयों का गहन अध्ययन कराया जाएगा, विषयों के चयन की आजादी होगी। अब साइंस, आर्ट, कॉमर्स की बंदिशें नहीं होगी, विद्यार्थी साइंस के विषय के साथ अपेन पंसद के आर्ट के भी विषय रख सकते है, जिसे जिस विषय में रूचि हैं, वे उस विषय को रखें। वहीं छठी क्लास से ही अब बच्चों को प्रोफेशनल और स्कील डेवलवमेंट की शिक्षा दी जाएगी। जबकि उच्च शिक्षा में ग्रेजुएशन अब 4 साल का होगा। राज्यपाल आज झारखंड अन-एडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर आयोजित एक राष्ट्रीय कॉन्क्लेव को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रही थी। राज्यपाल ने कहा कि लगभग पूरा विश्व नोवेल कोरोना वायरस से ग्रसित है। हमारा देश एवं राज्य भी इस भीषण चुनौती का सामना कर रहा है। इसका प्रभाव वर्तमान में हमारी शिक्षा व्यवस्था और बच्चों पर भी पडा है। हालांकि विभिन्न तकनीक के माध्यम से ऑनलाइन क्लास के प्रयास हो रहे है। सोशल डिस्टेसिंग और मास्क का उपयोग करने सहित कोविड-19 का पालन जरूरी है।
राज्यपाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 विभिन्न स्तरों अर्थात पंचायत से लेकर संसद तक पर प्राप्त सुझावों और चर्चाओं के उपरांत हम सबके बीच एक नये एवं समसामयिक स्वरूप में आई है। भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक डा0 कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में गठित आयोग की अनुषंसा पर केन्द्र सरकार ने इसे समय और जनमानस के अनुकूल तथा उनकी इच्छाओं के अनुरूप देखते हुए राष्ट्र के समक्ष इसे प्रस्तुत किया। इस नई शिक्षा नीति को देश को समर्पित करने के लिए वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं समिति के अध्यक्ष डा0 कस्तूरीरंगन को धन्यवाद
उन्होंने कहा कि जब देश के समक्ष कुछ नई नीति आई हो, तो उससे जनमानस को अवगत कराना, उस पर चर्चा करना, आपसी विचारों को साझा करना भी हमारा कर्तव्य एवं धर्म है। नई श्षक्षा नीति-2020 जनमानस की इच्छाओं और उनके अनुरूप बनाई गई है। सबको इस नीति के बारे में जानना चाहिये क्योंकि हमारा लक्ष्य है कि सभी शिक्षित एवं ज्ञानवान बनें। किसी भी सषक्त समाज के लिए यह आवष्यक है कि वहाँ के नागरिक शिक्षित एवं ज्ञानवान हों। नई शिक्षा नीति-2020 से लोगों को हम प्रत्यक्ष तौर पर विभिन्न स्थलों पर जाकर चर्चा करते और इसके बारे में अवगत कराते, जैसा कि मैं विभिन्न इलाकों में जाकर विभिन्न सरकार की विभिन्न योजनाओं पर जनता से परिचर्चा करती हूँ। लेकिन वर्तमान में हम सभी को नोवेल कोरोना महामारी को भी ध्यान रखना है।
हमारे विद्यालयों को भी अपने यहाँ इस प्रकार के माहौल एवं प्दतिंजतनबजनतम विकसित करने होंगे। बच्चों में सीखने की ललक पैदा करने होंगे। उन्हें उनकी रूचि के विषयों में और दक्ष बनायें। उन पर कोई जबर्दस्ती कोई विषय न थोपें। उन्होंने कहा कि यदि कोई विद्यार्थी किसी कारण बीच में पढ़ाई छोड़ा हो और उसका कुछ दिन अथवा वर्ष बाद फिर पढ़ाई पूर्ण करने का मन करे तो वह जहाँ से छूट गया था, वहाँ सीधे नामांकन लेगा। अर्थात इसमें बैंक ऑफ क्रेडिट सिस्टम का प्रावधान किया गया है।
नई षिक्षा नीति- 2020 में मातृभाषा की अहमियत का ध्यान रखा गया है। हमारे बहुत से बच्चे ऐसे हैं कि वे विभिन्न चीजों को जानते हैं और अपनी भाषा में व्यक्त कर सकते हैं लेकिन किसी विषिष्ट भाषा में नहीं बता सकते हैं। ऐसे में मातृभाषा में पढ़ने की बात अत्यन्त सराहनीय है, विषेषकर स्कूली शिक्षा में। झारखण्ड के परिप्रेक्ष्य में यह और भी महत्वपूर्ण है। इस षिक्षा नीति के लागू होने के बाद यहाँ के विद्यार्थी भाषायी कारणों से पीछे नहीं रहेंगे। अर्थात ज्ञान को अहमियत दी गई है। इसमें व्यहारिक ज्ञान पर बल दिया गया है।

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