October 27, 2020

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सोमवार को फिर बैठेंगे भारत-चीन के कोर कमांडर, मास्को में बनी पांच सूत्रीय सहमति को जमीन पर उतारने के लिए दबाव बनाएगा भारत

नई दिल्ली:- आखिरकार भारत और चीन के कोर कमांडरों के बीच सोमवार को छठे दौर की बैठक फाइनल हो गई है। काफी दबाव बढ़ाने पर चीन ने 16 या 17 सितम्बर को वार्ता का प्रस्ताव रखा था जिसे भारत ने यह कहते हुए नामंजूर कर दिया कि इतने छोटे नोटिस पर वार्ता नहीं हो सकती। इसके बाद भारत ने 20-21 को वार्ता करने का प्रस्ताव रखा जिस पर चीन सोमवार यानी 21 सितम्बर को कोर कमांडर स्तर की वार्ता के लिए तैयार हुआ है।भारत की तरफ से प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई लेह के 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह कर सकते हैं वहीं चीन की तरफ से वार्ता में मेजर जनरल लिउ लिन शामिल होंगे। यह वार्ता चीन के क्षेत्र मोल्डो में होगी।
इससे पहले दोनों देशों के कोर कमांडरों के बीच पांचवें दौर की वार्ता 02 अगस्त को सुबह 11 बजे से चीन की ओर स्थित मॉल्डो में हुई थी। लगभग 10 घंटे से ज्यादा चली इस बैठक में चीन और भारत के कॉर्प्स कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख के डेप्सांग मैदानी क्षेत्र, पैंगॉन्ग झील और गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स एरिया के विवादित मुद्दों पर चर्चा की थी। इसके बाद से लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर हालात बदलकर जंग की तरह लग रहे हैं। सीमा रेखा पर छह विवादित जगहों पर दोनों देशों की सेनाएं महज कुछ दूरी पर आमने-सामने हैं। सबसे गरम माहौल पैन्गोंग झील के दक्षिणी ओर है, जहां मुखपारी चोटी पर सिर्फ 170 मीटर और रेजांग लॉ में 500 मीटर की दूरी पर चीनी और भारतीय सैनिक हैं।
भारतीय सीमा क्षेत्र चुशुल में भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’ के तहत आधा दर्जन महत्वपूर्ण पहाड़ियों को अपने नियंत्रण में लेने के बाद यह 6वीं कोर कमांडर वार्ता होगी। दोनों सैन्य अधिकारियों के सामने एलएसी के दोनों तरफ तैनात हजारों सैनिकों और हथियारों को पीछे करना असल चुनौती है क्योंकि इस बीच हालात बहुत ज्यादा बदले हैं। भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच मास्को में बनी पांच सूत्रीय सहमति को जमीनी स्तर पर उतारने के मुद्दे पर कोर कमांडरों के बीच वार्ता का मुख्य मुद्दा हो सकता है। बैठक में भारत पिछली बैठकों में हुई सहमतियों को आगे बढ़ाने और सेनाओं को पीछे करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।

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