October 21, 2020

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हेमंत सरकार के खिलाफ गोलबंद हो रहे आदिवासी, लैंड म्यूटेशन बिल को बताया ‘काला कानून’

चाईबासा:- झारखंड के आदिवासी बहुल कोल्हान प्रमंडल में जल, जंगल और जमीन का मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा माना जाता है।जल, जंगल और जमीन के खिलाफ किसी भी कानून के विरोध में आदिवासी न सिर्फ सड़क पर उतर जाते हैं,बल्कि अपनी जान देने के लिए भी तैयार हो जाते हैं।पिछली रघुवर सरकार में कोल्हान के आदिवासियों ने ही सबसे अधिक सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन का विरोध किया था।जिसके कारण तत्कालीन रघुवर सरकार को सीएनटी-एसपीटी संशोधन बिल वापस लेना पड़ा था।तब जेएमएम ने हेमंत सोरेन के नेतृत्व में विधानसभा में खूब हंगामा किया था। लेकिन सत्ता में आने पर हेमंत सोरेन सरकार लैंड म्यूटेशन बिल ला रही है, जिसे रैयतों की जमीन की सुरक्षा के लिए खतरा बताया जा रहा है।जानकारों का कहना है कि रघुवर सरकार के सीएनटी-एसपीटी संशोधन बिल को ही नए तरीके से हेमंत सरकार ला रही है। इस लेकर कोल्हान में विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। विभिन्न आदिवासी संगठनों के नेता एक मंच पर आकर आगे की रणनीति बना रहे हैं।
नए बिल के विरोध में आदिवासियों को गोलबंद किया जा रहा है। विरोध में मिशन से जुड़े संगठन भी काफी सक्रिय हैं।वहीं लैंड म्यूटेशन बिल के विरोध में झामुमो से जुड़े रहे नेता और पूर्व विधायक भी मुखर हो रहे हैं।लैंड म्यूटेशन बिल को इन नेताओं ने आदिवासी-मूलवासी के लिए काफी खतरनाक बताया है और इसे काला कानून की संज्ञा दे रहे हैं।

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