October 30, 2020

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कोरोना वायरस प्रकोप के दौर में टेलिमेडिसिन का इंश्योरेंस कवरेज सुनिश्चित किया जाएगा : इरडा

नई दिल्‍ली:- कोरोनाराल में इंश्‍योरेंस रेग्‍युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (इरडा) ने सभी बीमा कंपनियों के लिए कुछ अनिवार्य दिशा निर्देश जारी किए हैं। इससे उपभोक्‍ताओं को लाभान्वित होंगे। इरडा के नए नियमों से हेल्‍थ इंश्‍योरेंस से जुड़े क्लेम का निपटान आसान होगा। साथ ही अस्पताल के खर्च कम करने में भी मदद मिलेगी। इंश्‍योरेंस रेग्‍युलेटर की ओर से कुछ नियमों में किए गए बदलाव उस कटौती से जुड़े हैं, जो बीमा कंपनियां क्लेम निपटान के दौरान करती हैं। ये नए नियम 1 अक्‍टूबर 2020 से लागू हो जाएंगे। हालांकि, इसके लिए आपको ज्यादा प्रीमियम चुकाना पड़ेगा।
दरअसल, अस्पताल में भर्ती होने के बाद कंज्‍यूमर को कैशलेस पॉलिसी के बाद भी बिल के कुछ हिस्से का भुगतान करना पड़ता है। ऐसा पॉलिसी में सब-लिमिट के कारण होता है, जो आमतौर पर अस्‍पताल के कमरे के किराये के लिए बीमा राशि का 1 फीसदी होता है। अगर पॉलिसीधारक सब-लिमिट के अनुपात में ज्यादा किराये वाला कमरा ले लेता है तो इसका असर क्‍लेम अमाउंट पर पड़ता है। नए नियम के तहत बीमा कंपनियों से कहा गया है कि वे इलाज के दौरान खर्चों को अलग-अलग स्पष्ट करें। आसान शब्‍दों में समझें तो बीमा कंपनियों को अब ये साफ तौर पर बताना होगा कि इलाज, दवा, कमरे का किराया और जांच में अलग-अलग कितना खर्च क्‍लेम मिलना है। बीमा नियामक ने कहा है कि कंपनियां अगर खर्चों को स्पष्ट नहीं करती हैं तो इलाज के बाद वह इनका हवाला देकर क्लेम में कटौती नहीं कर पाएंगी। नया नियम 1 अक्‍टूबर 2020 या उसके बाद खरीदी जाने वाली स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी पर लागू होगा। हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी के महत्वपूर्ण क्‍लॉजेज के स्‍टैंडर्डाइजेशन से कंज्यूमर्स को नियम समझने में और दूसरे प्रोडक्ट्स से तुलना करने में आसानी होगी। कोरोना वायरस प्रकोप के दौर में टेलिमेडिसिन का इंश्योरेंस कवरेज सुनिश्चित किया जाएगा। इरडा ने दिशानिर्देशों में बीमा कंपनियों को इंश्योरेंस पॉलिसी कांट्रेक्ट में टर्म और क्लॉज का स्टेडराईजेशन करने के लिए कहा गया है। ये क्‍लॉज 1 अक्टूबर 2020 से हर नई पॉलिसी में रखे जाएंगे।
कोविड-19 संकट के दौर में अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के मद्देनजर बड़ी संख्‍या में लोग हेल्‍थ इंश्‍योरेंस खरीद रहे हैं। हालांकि, अस्पतालों की निगरानी के लिए न तो कोई नियामक है और न ही इनके बीच अंतर करने के लिए बेंचमार्क तय है। ऐसे में इरडा का यह कदम उपभोक्‍तओं के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। यह अस्पतालों में मिलने वाली सेवाओं और उनके प्रदर्शन से जुड़ा डाटाबेस बनाने में मदद करेगा, जिससे मरीजों को जरूरी इलाज के लिए सही अस्पताल का चुनाव करने में काफी मदद मिलेगी। यूनिवर्सल सॉम्‍पो जनरल इंश्‍योरेंस कपनी के चीफ अंडरराइटर निर्मल भट्टाचार्य ने कहा कि बीमा कंपनियां नए फीचर्स के साथ प्रोडक्‍ट लाएंगी तो प्रीमियम में 20 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है।

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