October 22, 2020

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लैंड म्यूटेशन बिल को मौजूदा स्वरूप में विधानसभा में पेश करने की संभावना क्षीण

सरकार में शामिल कांग्रेस के बाद मुख्य विपक्षी दल बीजेपी ने भी विरोध किया

रांची:- झारखंड मंत्रिपरिषद की ओर से लैंड म्यूटेशन बिल 2020 को मंजूरी दी गयी थी और इसे विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश करने की तैयारी की गयी थी। लेकिन सरकार में शामिल प्रमुख सहयोगी दल कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित लैंड म्यूटेशन बिल के कुछ प्रावधान पर आपत्ति दर्ज कराने के बाद मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने भी इसे काला कानून बताया है।
बीजेपी विधायक और राज्य के पूर्व भू राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री सह विधायक अमर कुमार बाउरी ने विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए झारखंड लैंड म्यूटेशन बिल 2020 का विरोध किया। उन्होंने इस बिल को काला कानून बताया । अमर बाउरी ने कहा की जिस तरह से सरकार के मंसूबे का पर्दाफाश हो रहा है उसने यही साबित होता है कि इस विधेयक को लेकर सरकार के अंदर खाने हलचल मची हुई है। सहयोगी दल खुद ऊहापोह की स्थिति में है कि क्या करें क्या ना करें। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार जो बिल लेकर आई है वह गरीब दलित रैयतों के जमीन को लूटने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि यह बिल सीएनटी एसपीटी एक्ट का उल्लंघन है और सीएनटी एसपीटी एक्ट के मूल आधार का हनन है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस बिल का पुरजोर विरोध करेगी और गरीब दलित रैयतों के अधिकार के लिए लड़ने का काम करेगी।
विधानसभा सत्र के औपबंधिक कार्यक्रम के अनुसार राज्य सरकार की ओर से सत्र के अंतिम दिन 22 सितंबर को राजकीय विधेयक को सभा पटल पर रखने की तैयारी है। सरकार की ओर से प्रारंभ में पांच विधेयक झारखंड लैंड म्यूटेशन, दंड प्रक्रिया संहिता, झारखंड मिनल वेयरिंग सेस, झारखंड मोटर वाहन करारोपण और राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन विधेयक 2020 को सभा पटल पर रखने की तैयारी की गयी है, लेकिन जिस तरह से सरकार में शामिल कांग्रेस के कुछ विधायक खुलकर इसके विरोध में आ गये है,वहीं जेएमएम के भी कई विधायक इस बिल के कुछ प्रावधान के विरोध में है,ऐसी स्थिति में यह संभावना जतायी जा रही है कि फिलहाल राज्य सरकार इस लैंड म्यूटेशन बिल को विधानसभा में मौजूदा स्वरूप में नहीं पेश करेगी, कुछ आवश्यक संशोधन के साथ ही इस बिल को पेश किये जाने की संभावना है।

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