October 25, 2020

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कोविड-19 से निपटने को लेकर लचर व कुव्यवस्था पर हाईकोर्ट ने जतायी नाराजगी

1अक्टूबर को स्वास्थ्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने का आदेश

रांची:- झारखंड उच्च न्यायालय ने कोविड-19 से निपटने को लेकर लचर और कुव्यवस्था पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अगली सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव और रिम्स निदेशक को वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने बताया कि कोविड -19 से निबटने की योजनाओं को लेकर स्वतः संज्ञान और दायर अन्य जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायमूर्ति डॉ रवि रंजन एवं न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने रिम्स के प्रभारी निदेशक और राज्य के स्वास्थ्य सचिव को 1 अक्टूबर 2020 को अदालत के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहने का आदेश दिया है। अदालत ने रिम्स की लचर व कुव्यवस्था के लिए प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार व रिम्स से पूछा है कि रिम्स में चिकित्सा पदाधिकारियों, नर्सिंग और पारा मेडिकल स्टाफ्स के कितने पद रिक्त हैं ? जब सरकार ने रिक्त पदों को भरने की बात कही है । इसके बावजूद रिक्तियों को भरने की दिशा में कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान में काफी सुधार की आवश्यकता है , मौजूदा स्थिति में रिम्स के उपर ही राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था निर्भर करती है,इसलिए न्यायालय का पूरा ध्यान रिम्स की व्यवस्था सुधारने की ओर केन्द्रित है। खंडपीठ ने राज्य सरकार से जानना चाहा कि केंद्र व राज्य सरकार के द्वारा लगभग एक अरब रुपए प्रति वर्ष रिम्स पर खर्च किए जाने के बाद भी राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में सिर्फ एक सीटी स्कैन मशीन क्यों है? और क्या कारण है कि जो भी व्यक्ति अपनी कोरोना जांच करा रहे हैं , उनका परिणाम 10 दिनों बाद मिल रहा है? अदालत ने इन सभी बिंदुओं पर राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए 2 सप्ताह बाद इस मामले में फिर से सुनवाई के लिए 1 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है। अगली सुनवाई के दौरान झारखण्ड सरकार के स्वास्थ्य सचिव एवं रिम्स निदेशक (प्रभारी) को भी विस्तृत जवाब के साथ उपस्थित रहने को कहा है।

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