October 20, 2020

अनावरण न्यूज़

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आईटीआई में प्राचार्य व इंस्ट्रक्टर की नियुक्ति मामले में हुई सुनवाई

रांची:- झारखंड उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायमूर्ति एवं न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने आई० टी० आई में प्राचार्य व इंस्ट्रक्टर की नियुक्ति एवं उनमें प्रशिक्षण कार्य को प्रारंभ करने को लेकर, भीम प्रभाकर के द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की । याचिकाकर्ता के द्वारा बताया गया है कि आई०टी०आई में प्रशिक्षण के लिए बिल्डिंग खड़ी कर दी गई है लेकिन प्रशिक्षण कार्य प्रारंभ नहीं होने के कारण सभी बिल्डिंग जर्जर स्थिति में आ गई है । इस मामले को गंभीरतापूर्वक लेते हुए खंडपीठ ने आज सुनवाई के दौरान श्रम रोजगार प्रशिक्षण सचिव को उपस्थित रहने को कहा था, सचिव ने उपस्थित होकर अदालत को अवगत कराया की इस संदर्भ में कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार को नियुक्ति प्रक्रिया करनी है, इस पर अदालत में अगली सुनवाई के दौरान श्रम रोजगार प्रशिक्षण सचिव के साथ साथ कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहकर विस्तृत जवाब पेश करने को कहा है मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
इससे पहले आज झारखंड उच्च न्यायालय में डॉ भीम प्रभाकर द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ में श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो के द्वारा अदालत में उपस्थित होकर यह बात स्पष्ट रुप से रखा गया कि विभाग औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में अनुदेशक की बहाली के लिए नियुक्ति नियमावली पुनः नए तरीके से बना करके कार्मिक विभाग सचिव की सहायता से जे एस एस सी के माध्यम से जल्द से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी इसके लिए लगभग 1 वर्ष का समय लगेगा। इसके जवाब में चीफ जस्टिस के द्वारा यह बोला गया कि 1 साल 2 साल कहने से नहीं चलेगी जल्द से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया को पूरी करें और इसके लिए 2 सप्ताह के अंदर नियुक्ति नियमावली बनाकर के अनुदेशक, प्राचार्य व अन्य प्रकार की कर्मचारी नियुक्ति प्रक्रिया पर विचार करें इसके लिए 9 अक्टूबर 2020 को पुनः झारखंड उच्च न्यायालय की सुनवाई की जाएगी जिसमें श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव को स्पष्ट करने को कहा गया है।
याचिका कर्ता के वकील विनोद सिंह ने बहस के दौरान कहा कि आईटीआई बिना कोई योजना के खोले जा रहे हैं।कहा कि प्रशिक्षित अनुदेशकों की बहाली डीजीटी के द्वारा जारी मापदंडों के अनुसार किया जाय।

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