September 27, 2020

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सहज है बच्चे को मोटा होने से रोकना और बीमारी से बचाना : पारस हॉस्पिटल

राँची:- डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, सांस लेने में तकलीफ, बांझपन, संतानहीनता तथा कैंसर जैसे रोगों की जन्मदाता माने जाने वाली मोटापा गैर संक्रमित क्राॅनिक बीमारी है जिसकी शुरूआत से बच्चे को बचाने के लिए खान-पान तथा उसकी शारीरिक गतिविधी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही सुखद पारिवारिक माहौल भी अति आवश्यक है। अगर घर में कलह, झगड़ा होते रहेंगे तो बच्चे के खान-पान के बढ़ने की समस्या आ जाती है और इससे वह मोटा होने लगता है। अभी विश्व में 18 साल से कम उम्र के 190 मिलियन बच्चे मोटापा के शिकार हैं जबकि भारत में पांच साल से कम आयु के 41 मिलियन बच्चे मोटापा से जूझ रहे हैं। मोटापा की रोकथाम के लिए उम्र और शरीर की लम्बाई के हिसाब से उसके वजन पर ध्यान देने की जरूरत है। बच्चे को मां का दूध दें तथा जंक फूड, चाॅकलेट, मिठाई आदि का अत्यधिक सेवन करने से रोकें। तैलीय पदार्थ से परहेज करवाएं। इसलिए माता-पिता के लिए यह सहज है कि वे अपने बच्चे को मोटा होने से रोकें और इससे हाने वाली बिमारीयों से बचाएं।

पारस एचईसी हॉस्पिटल के शिशु रोग विशेषज्ञ डाॅ. संजीव कुमार ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मोटापा से बच्चों को बचाने के लिए माता-पिता में जागरूकता जगाने की आवश्यकता है। उन्हें मोटापा से बचाने के तरीकों के बारे में शिक्षित करना होगा। मोटापा भी एक तरह का कुपोषण ही है। यह अत्यधिक खाने से होता है। जन्म के बाद से बोतलबंद दूध की जगह मां का दूध पिलाएं और उसके बाॅडी मास इंडेक्स (बी.एम.आई.) को जानने का प्रयास करें। बी.एम.आई. 18.5 से 24.99 किलाग्राम के बीच में होना चाहिए। इसके लिए बच्चे का वजन किलाग्राम में लें और उसे उसके शरीर की लम्बाई के स्क्वैर से भाग दें तो बी.एम.आई. निकल जायेगा।

डाॅ. संजीव ने कहा कि मोटापे के कारण गाॅल ब्लाडर की गड़बड़ी, खर्राटा लेने की आदत, आस्टयो अर्थोराइटिस, गाउट की भी बीमारी हो सकती है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर बच्चों के माता-पिता को शिशु रोग विशेषज्ञ से उसके खान-पान, आदत आदि पर सलाह लेते रहना चाहिए।

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