September 26, 2020

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हेमंत सरकार सहायक पुलिसकर्मियों के साथ अमानवीय व्यवहार कर रही है – रघुवर दास

आंदोलनकारी सहायक पुलिसकर्मियों का पांचवें दिन भी प्रदर्शन जारी

रांची:- सीधी नियुक्ति की मांग को लेकर झारखंड के 12 नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अनुबंध पर कार्यरत 2200 से अधिक सहायक पुलिसकर्मियोंका बुधवार को भी आंदोलन जारी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलवाने की मांग को लेकर राज्य के 12 उग्रवाद प्रभावित जिलों से रांची पहुंचे अनुबंधित सहायक पुलिस कर्मी राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में खुले आसमान के नीचे डटे है। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल है। सभी को काफी मुश्किलो का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता बुधवार को धरनास्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारी सहायक पुलिसकर्मियों से मुलाकात की।
इस मौके पर रघुवर दास ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के आदिवासी-मूलवासी युवक-युवतियों को नक्सलियों के चंगुल से बचाने के लिए हमारी सरकार ने अनुबंध पर सहायक पुलिस की नियुक्ति शुरू की थी। तीन साल के अनुबंध के बाद नियमित बहाली करने का लक्ष्य था। इसके लिए समुचित प्रावधान भी किये गये। आदिवासी-मूलवासियों की हितैषी होने का दावा करनेवाली वर्तमान सरकार इन पर अत्याचार कर रही है। उन्होंने बताया कि इनकी नियुक्ति से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियों को लगाम लगाने में काफी मदद मिली। इन्होंने काफी ईमानदारी से काम किया। कोरोना के दौरान भी इनका कार्य सराहनीय रहा। अब हेमंत सोरेन की सरकार ने इनकी नियुक्ति पर रोक लगा कर इनके साथ अन्याय किया है। यह अमानवीय व्यवहार है। सरकार को संवदेनशील होकर इनकी जायज मांगे माननी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि सहायक पुलिसकर्मियों की सीधी नियुक्ति के लिए भत्र्ती की प्रक्रिया शुरू करें। जबतक प्रक्रिया चलती है, तब तक इनका अनुबंध विस्तार करे। उन्होंने कहा कि सहायक पुलिस कर्मियों को आंदोलन करते चार दिन हो गये हैं, लेकिन अब तक न तो कोई मंत्री न ही अधिकारी इनकी समस्या सुनने आया है। उलटे इनपर एफआइआर की जा रही है, इनकी परिवार वालों को धमकाया जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में इस प्रकार का दमन बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने जिस तरह से सहायक महिला पुलिसकर्मी तपती धुप और कोरोना महामारी के बीच अपने घर से दूर छोटे-छोटे बच्चों को लेकर आंदोलन करने को बाध्य हैं। राज्य सरकार एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाकर इनकी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करे, वरना भाजपा आंदोलन करने को बाध्य होगी।
झारखंड लैंड म्यूटेशन बिल 2020 के संबंध में उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल का काम है नीतियां बनाना और ब्यूरोक्रेसी का काम है, उसे लागू कराना। लेकिन इस सरकार में उल्टा हो रहा है। ब्यूरोक्रेट्स नीतियां बना रहे हैं और मंत्रिमंडल उसको लागू कर रहा है। वर्तमान सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री कहते हैं कि उन्होंने कैबिनेट में आया संलेख पढ़ा ही नहीं और यह पास हो गया। इसी तरह जब हेमंत सोरेन जी पिछली बार मुख्यमंत्री बने थे और सीसैट को समाप्त किया था, तब भी उन्होंने विधानसभा में माना था कि अधिकारियों ने उनसे हस्ताक्षर करवा लिए थे।

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