September 23, 2020

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

चीन के सरकारी मीडिया की घुड़की, पांच सूत्री सहमति लागू करे भारत नहीं तो वह युद्ध को तैयार

पेइचिंग:- भारतीय क्षेत्र पूर्वी लद्दाख के समीप वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) में चल रहे तनाव के बीच चीन के नेता एक तरफ जहां शांति की बात कर रहे हैं, वहीं उसका सरकारी मीडिया युद्ध की धमकी देने में लगा हुआ है। चीन के सरकारी अखबार के संपादक हू शिजिन ने कहा कि चीनी सेना भारतीय टैंकों का खात्‍मा करने का अभ्‍यास कर रहे हैं। उन्‍होंने धमकी दी कि अगर भारत ने मास्‍को में विदेश मंत्रियों के बीच हुई पांच सूत्री सहमति को लागू नहीं करता है तो चीनी सेना भारत को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए बयान के बाद चीन को तीखी मिर्ची लगी है। शिजिन ने दावा किया कि चीनी सेना के दबाव की वजह से भारतीय सेना के रुख में नरमी आई है। उन्‍होंने कहा कि पीएलए पैंगोंग झील के पास भारत-चीन सीमा पर निर्णायक कार्रवाई के लिए अपनी तैनाती को बढ़ा रही है। अखबार के संपादक ने कहा कि बीजिंग चीन-भारत सीमा विवाद को शांतिपूर्वक सुलझाने के लिए प्रयास कर रहा है लेकिन अपनी सेना को तैयार रखेगा।
उधर, अखबार ने विशेषज्ञों के हवाले से दावा किया कि भारत कठोर रवैया अपना रहा है और दोनों के बीच यह तनाव आने वाले ठंड के महीनों तक जारी रह सकता है। उसने कहा कि चीनी सेना को सर्दियों के मौसम तक गतिरोध के जारी रहने के लिए तैयार रहना चाहिए। बता दें कि भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच 5 सूत्री सहमति होने के बाद भी चीन का सरकारी प्रोपेगैंडा मीडिया भारत को धमकाने और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने में जुटा हुआ है। चीनी अखबार ने चीनी विश्‍लेषक झांग शेंग के हवाले से दावा किया कि भारत पंडित जवाहर लाल नेहरू की गलती को दोहरा रहा है। उसने कहा कि भारत का वर्तमान प्रशासन सीमा पर आक्रामक व्‍यवहार दिखा रहा है। झांग ने कहा कि वर्तमान स्थिति वर्ष 1962 की तरह से ही है। उन्‍होंने आरोप लगाया कि भारत अपने हितों के लिए अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय की मदद से चीन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। वर्ष 1962 में चीन सबसे अलग थलग था। उस समय चीन अमेरिका से मुकाबला कर रहा था और उस समय रूस से भी चीन अलग राह पर चल रहा था। जबकि भारत उस समय गुटन‍िरपेक्ष आंदोलन का अगुवा था। चीनी विश्‍लेषक ने आरोप लगाया कि वर्ष 1962 में भारत ने अंतरराष्‍ट्रीय माहौल का फायदा उठाने की कोशिश की थी। इसका परिणाम यह हुआ कि भारत ने तीसरी दुनिया के देशों के नेता पदवी भी खो दी। झांग ने कहा कि भारत की मोदी सरकार भी नेहरू की रणनीति पर काम कर रही और चीन- अमेरिका तनाव का फायदा उठाना चाहती है। उन्‍होंने कहा कि भारत के रक्षा मंत्री अतिआत्‍मविश्‍वास दिखा रहे हैं।

Recent Posts

%d bloggers like this: