September 26, 2020

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अवार्ड असाधारण शिक्षकों की पहचान करने को मान्यता देने के लिए लाया गया: मंत्री रमेश ‘निशंक’

नई दिल्ली:- केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त संस्थानों के 12 संकाय सदस्यों को प्रथम एआईसीटीई विश्‍वेश्‍वरैया बेस्ट टीचर्स अवार्ड-2020 से सम्मानित किया। इस समारोह को वर्चुअल तरीके से आयोजित किया और मंत्री ने ऑनलाइन बातचीत के बाद संकाय सदस्यों को सम्मानित किया।समारोह के दौरान एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. अनिल डी सहस्रबुद्धे, एआईसीटीई के उपाध्यक्ष प्रो. एम पी पूनिया और सदस्य सचिव एआईसीटीई प्रो. राजीव कुमार ने भी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों के महत्व पर प्रकाश डाला। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सर मोक्षगुंडम विश्‍वेश्‍वरैया भारत में इंजीनियरिंग के जन्मदाता थे। वे भारत के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरों और स्टेट्समैन में से एक हैं, जिनका देश की प्रगति में अविस्मरणीय योगदान है। राष्ट्र निर्माण में उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें 1955 में सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।
मंत्री पोखरियाल ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय विश्‍वेश्‍वरैया जैसे दिग्गजों के स्थापित आदर्शों को साकार करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लाया है, जिसके जरिए उच्च शिक्षा में एक व्यापक और बहु-विषयी शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाएगा। हालांकि, संकाय की गुणवत्ता और जुड़ाव उच्च शिक्षा संस्थानों की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण कारक है। उच्च शिक्षा के लक्ष्यों को प्राप्त करने में संकाय की जरूरत को स्वीकार करते हुए पिछले वर्षों में भर्तियों और करियर की प्रगति को व्यवस्थित करने, और संकाय की भर्तियों में विभिन्न समूहों का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए पिछले वर्षों में कई कदम उठाए गए हैं।
एआईसीटीई विश्‍वेश्‍वरैया बेस्ट टीचर्स अवॉर्ड-2020 पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि पहली बार यह पुरस्कार असाधारण शिक्षकों की पहचान करने और राष्ट्रीय स्तर पर डिग्री और डिप्लोमा संस्थानों के लिए उच्च तकनीकि शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्टता, उत्तम कार्यव्यवहार और नवाचारों को मान्यता देने के लिए लाया गया है। इस योजना का लक्ष्य प्रत्येक वर्ष इंजीनियर्स डे पर राष्ट्रीय स्तर पर मेधावी संकायों की पहचान करना और उन्हें वैश्विक स्तर पर उच्च शिक्षा की लगातार बदलती जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिसके जरिए वे समाज के लिए एक प्रभावशाली योगदानकर्ता बन सकते हैं। पोखरियाल ने कहा कि देश में संपूर्ण उच्च तकनीकी शिक्षा को सुधारने के लिए एआईसीटीई के गुणवत्तापूर्ण को ध्यान में रखते हुए यह योजना उन्हीं को सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा की पहचान करने के लिहाज से केंद्रित करती है। उन्होंने कहा कि एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त सभी संस्थानों से इसके लिए प्रस्ताव मांगे गये थे। शोध, 360 डिग्री फीडबैक, छात्र विकास में योगदान और सामाजिक समस्याओं के समाधान की प्राथमिकता के साथ मूल्यांकन के मापदंड़ों को पहले ही तय कर दिया था। इस मामले में लोगों की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली. संस्थानों से मिले प्रस्तावों में से 261 प्रस्तावों को गुरुग्राम के नॉर्थ कैप यूनिवर्सिटी में प्रो-चांसलर, प्रोफेसर ऑफ एमिनेंस और चीफ मेंटर प्रो. प्रेमव्रत की अध्यक्षता वाली 7 सदस्यीय समिति के जरिए मूल्यांकन करने के लिए चुना गया। पुरस्कारों के लिए अंतिम रूप से 12 उम्मीदवारों का चयन हुआ।

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