October 22, 2020

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

प्याज के दाम आसमान पर तो, टमाटर भी तीन गुना हुआ लाल

नई दिल्ली:- बारिश के मौसम में हरी सब्जियों के महंगे होने का बात कोई नई नहीं है। टमाटर, प्याज और आलू की कीमत काबू में रहे तो भी रसोई का काम चल जाता है। हरी सब्जी महंगा होने पर अधिकतर लोग छोले, राजमा, दाल आदि की शरण में चले जाते हैं। लेकिन इसे बनाने के लिए भी प्याज, टमाटर आदि की जरूरत पड़ती है। यह भी अभी महंगा हो गया है। अभी से महज एक पखवाड़े पहले रिटेल में 15 से 20 रुपये प्रति किलो बिकने वाला प्याज अभी 45 से 50 रुपये किलो बिक रहा है। आलम यह है कि सड़े हुए प्याज भी 25 रुपये किलो बेचे जा रहे हैं। एशिया की सबसे बड़ी सब्जी मंडी, दिल्ली की आजादपुर मंडी में आज प्याज का होलसेल रेट 26 से 37 रुपये किलो रहा। कारोबारियों का कहना है कि इसकी कीमतों में तेजी के पीछे प्याज की फसल का खराब होना है। दरअसल, कर्नाटक में पिछले दिनों हुई भारी बारिश की वजह से प्याज की खड़ी फसल को भारी नुकसान हुआ है।
टमाटर भी इन दिनों खूब लाल हुआ जा रहा है। हालांकि, होलसेल में तो अभी भी टमाटर 45 से 55 रुपये किलो बिक रहा है, लेकिन रिटेल में यह 70 से 90 रुपये प्रति किलो के बीच चला गया है। सहकारी नियंत्रण वाले मदर डेयरी के सफल में टमाटर 78 रुपये प्रति किलो के भाव मिल रहा है। ऐसे में किलो भर टमाटर खरीदने वाले लोग पाव के हिसाब से इसे खरीद रहे हैं। जब कोरोना की वजह से लॉकडाउन हुआ था, तब टमाटर किसानों को बड़ा घाटा हुआ था। उस समय टमाटर की कीमत एक से दो रुपये किलो तक नीचे आ गई थी। कई जगह तो टमाटर को खेत में सड़ने इसलिए छोड़ दिया गया था, क्योंकि उसे तोड़ कर बेचने पर तुड़ाई का दाम भी नहीं निकल रहा था। इसलिए अगली फसल में किसानों ने टमाटर की फसल से तौबा कर लिया। गरीबों का सहारा आलू भी आंखें तरेर रहा है। कहा जाता है कि जब सब्जियों की कीमत आसमान में चली जाती है, तब गरीब लोग आलू के सहारे ही निवाला गले के नीचे उतारते हैं। वैसे भी बरसात के मौसम में हरी सब्जी की कीमत आसमान छूती ही है। इसलिए यदि आलू की कीमत काबू में रहे तो दिक्कत नहीं होती है। लेकिन इस बार कोरोना की वजह से आलू ने भी दगा दे दिया।

Recent Posts

%d bloggers like this: