October 26, 2020

अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

उमर खालिद की गिरफ्तारी पर वकील प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव ने उठाएं सवाल

नई दिल्ली:- दिल्ली दंगा मामले में जवाहरलाल यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद की गिरफ्तारी को लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस की ओर से जांच की आड़ में शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं को फंसाने की साजिश है। स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने भी उमर खालिद की गिरफ्तारी का विरोध किया है।
प्रशांत भूषण ने कहा, सीताराम येचुरी, योगेंद्र यादव, जयति घोष और अपूर्वानंद का नाम लेने के बाद अब उमर खालिद की गिरफ्तारी से दिल्ली दंगे की जांचकर रही दिल्ली पुलिस के दुर्भावनापूर्ण नजरिये को समझने में कोई संदेह नहीं बचा है। यह पुलिस की ओर से जांच की आड़ में शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं को फंसाने की साजिश है।’ स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने भी उमर खालिद की गिरफ्तारी पर सवाल उठाकर कहा, हैरान हूं कि आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए का इस्तेमाल युवा और आदर्शवादी उमर खालिद को गिरफ्तार करने के लिए किया गया।खालिद ने हमेशा किसी न किसी रूप में हिंसा और सांप्रदायिकता का विरोध किया है। वहां निस्संदेह उन नेताओं में से हैं, जो भारत के हकदार हैं। दिल्ली पुलिस भारत के भविष्य को लंबे समय तक हिरासत में नहीं रख सकती।
जेएनयू के पूर्व छात्रनेता उमर खालिद को उत्‍तर-पूर्वी दिल्‍ली में दंगों से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया है। इसी साल फरवरी में हुई हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी। खालिद को पूछताछ के लिए रविवार को स्‍पेशल सेल के लोधी कॉलोनी वाले ऑफिस में तलब किया गया था। दोपहर एक बजे पहुंचे खालिद को शाम होते-होते अरेस्‍ट कर लिया गया। पुलिस ने खालिद से 31 जुलाई को भी पूछताछ की थी। तब उनका फोन सीजकर लिया गया था। दिल्‍ली पुलिस आने वाले दिनों में उमर खालिद के खिलाफ चार्जशीट दायर करने की तैयारी में है। दिल्‍ली के रहने वाले उमर खालिद के पिता स्‍टूडेंट्स इस्‍लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के सदस्‍य और वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष रहे हैं। दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से बैचलर्स डिग्री लेने के बाद उमर खालिद ने जेएनयू का रुख किया। यहां से मास्‍टर्स और एम.फिल करने के बाद उन्‍होंने पीएचडी भी पूरी कर ली है। पढ़ाई के साथ-साथ खालिद की दिलचस्‍पी ऐक्टिविज्‍म में भी रही है। वह छात्रनेता रहे हैं और कई सार्वजनिक मंचों से केंद्र की बीजेपी सरकार पर तीखे हमले करते रहे हैं।

Recent Posts

%d bloggers like this: