October 20, 2020

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राजनीति जीवन बेहद सादगी भरा रहा रघुवंश प्रसाद का

पटना:- बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता रघवुंश प्रसाद सिंह का निधन हो गया है। वह राजद में लालू प्रसाद के बाद सबसे चर्चित चेहरा थे। रघुवंश प्रसाद लालू प्रसाद के सबसे करीबी नेताओं में गिने जाते रहे थे। दो दिन पहले ही रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया था, तो लालू प्रसाद ने भावुक होकर उनसे नहीं जाने की अपील की थी। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और अन्य पक्ष-विपक्ष के नेताओं ने शोक प्रकट किया है।
रघवुंश प्रसाद लगभग पांच दशक से सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहे हैं। बिहार में लालू प्रसाद की पार्टी में वह कई सालों में सवर्ण चेहरा के रूप में स्थापित थे। राजपूत समुदाय के रघुवंश प्रसाद सिंह लालू प्रसाद की तरह ही देसी अंदाज में भाषण देने वाले वक्ता के रूप में चर्चित रहे। एक समय वे राजद में लालू प्रसाद यादव के समानांतर नेता माने गए और पार्टी के अंदर स्वाभाविक रूप से नंबर दो हो गए थे। फिजिक्‍स के प्रोफेसर रहे रघुवंश प्रसाद सिंह का राजनीति जीवन बेहद सादगी भरा रहा। एक बार मंत्री के रूप में वह दिल्ली के कनॉट प्लेट में चले गए थे, जहां दुकानदार उन्हें पहचान नहीं पाया और एक सामान के लिए अधिक कीमत ले ली थी।
74 वर्षीय रघुवंश प्रसाद सिंह ने अपना राजनीतिक सफर जेपी आंदोलन में शुरू किया था। 1977 में वह पहली बार विधायक बने और बाद में बिहार में कर्पूरी ठाकुर सरकार में मंत्री बने। वह बिहार के वैशाली लोकसभा क्षेत्र से पांच बार सांसद रहे। इस बार वे इसी क्षेत्र से जेडीयू नेता से चुनाव हार गए थे। गणित के प्रोफेसर रहे रघुवंश प्रसाद का लालू प्रसाद से संबंध जेपी मूवमेंट से रहा है और दोनों एक दूसरे के बेहद करीब भी रहे। जब 1990 में लालू प्रसाद सीएम बने तो रघुवंश प्रसाद सिंह को विधान परिषद सदस्य बनाया, जबकि वह विधानसभा चुनाव हार चुके थे।
जब एच डी देवेगौड़ा प्रधानमंत्री बने तो लालू प्रसाद ने उन्हें बिहार कोटे से मंत्री बनवाया, लेकिन रघुवंश प्रसाद सिंह की राष्ट्रीय राजनीति में पहचान अटल सरकार के दौरान बतौर राजद नेता मिली। तब लालू प्रसाद बिहार के मधेपुरा से लोकसभा चुनाव हार गए थे। रघुवंश प्रसाद सिंह लोकसभा में पार्टी के नेता बने। सरकार को घेरने वाले सबसे प्रखर आवाज बने थे।

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