October 23, 2020

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नौकरी बहाल न हुई तो होना पड़ेगा नक्सलियों की गोली का शिकार

झारखंड में आंदोलनरत सहायक पुलिसकर्मियों की सीएम हाउस पर नजर

रांची:- झारखंड में 2269 सहायक पुलिसकर्मी सूबे की विधि व्यवस्था में अपना सहयोग दे रहे हैं। लेकिन अब इनकी नौकरी को लेकर समीक्षा की जा रही है कि इन्हें रखना फायदेमंद है या नहीं? इसी को लेकर पुलिस मुख्यालय ने एक पत्र जारी किया, जिसके बाद सहायक पुलिसकर्मी आंदोलनरत हैं। प्रदेश के 12 जिलों से पैदल चलकर सहायक पुलिसकर्मी सरकार तक अपनी आवाज को पहुंचाने एक लिए रांची पहुंचे हैं। इनका कहना है कि रघुवर सरकार में उन्हें अनुबंध पर नियुक्त किया गया था और 3 वर्षों बाद सीधी नियुक्ति का भी आश्वासन दिया गया था। लेकिन अब इनकी नौकरी पक्की करने के बजाय इन्हें हटाने की बात की जा रही है। सरकार तक अपनी मांगों को पहुंचाने को लेकर सहायक पुलिसकर्मियों का शनिवार को राजभवन और मुख्यमन्त्री आवास घेराव का कार्यक्रम था। लेकिन रांची पुलिस ने सभी को मोरहाबादी मैदान में ही रोका दिया। कुछ लोग राजभवन तक पहुंचे, लेकिन उन्हें भी पहले हल्का बल प्रयोग कर और बाद में समझा-बुझाकर वापस मोरहाबादी मैदान भेज दिया गया। चाईबासा के रहने वाले सहायक पुलिसकर्मी सुनील कुमार का कहना है कि अगर उनकी नौकरी जाती है तो वह अपने गांव में भी रहने लायक नहीं रहेंगे। क्योंकि नक्सल प्रभावित इलाकों से निकलकल वे लोग पुलिस में बहाल हुए। इसकी जानकारी नक्सलियों को भी है। ऐसे में नौकरी जाने की स्थिति में या तो इन्हें नक्सली दस्ते में शामिल होना होगा, नहीं तो नक्सली की गोली का शिकार होना होगा। मामले पर वरीय पुलिस अधिकारी ने बताया है इनकी बातों से वरीय अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा और वरीय अधिकारी भी इस पूरे मुद्दे पर संजीदगी से विचार करेंगे, क्योंकि ये भी पुलिस परिवार का ही हिस्सा हैं। पुलिसिंग की ट्रेनिंग इन्हें मिल चुकी है। उधर, नक्सली भी अपने कैडर को बढ़ाने को लेकर इनदिनों जद्दोजहद कर रहे हैं। ऐसे में ये सहायक पुलिसकर्मी उनके लिए तैयार कैडर साबित हो सकते हैं।

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