October 26, 2020

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बिहार की सत्ता में बड़ी बाधा कोरोना, बाढ़ और 15 साल की एंटी-इंकम्बेंसी

आसान नहीं है नीतीश कुमार की राह, पीएम मोदी और बीजेपी से आस

पटना:- कोरोना काल में बिहार चुनाव की सरगर्मी तेज हो चली हैं। नीतीश सरकार फिर सत्ता के सपने देख रही है, लेकिन कोरोना, बाढ़ और 15 साल की एंटी-इंकम्बेंसी, ये तीन मुद्दे नीतीश कुमार और उनकी जीत के बीच में खड़े हुए हैं। कोरोना और बाढ़ के दौरान विपक्ष का आरोप था कि जनता ने इस दौरान भारी तकलीफ़ झेली, लेकिन नीतीश कुमार सरकार उतनी सक्रियता नहीं दिखाई जैसा एक सरकार से उम्मीद की जाती है। इसके अलावा 15 साल की एंटी इंकम्बेंसी भी बड़ी चुनौती है। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस सब के बावजूद पीएम मोदी का चेहरा एक ऐसा अस्त्र है, जो विपक्ष को धाराशायी करने के लिए काफी है। अगले कुछ दिनों मे पीएम मोदी की बिहार में काफी योजनाओं का ऐलान भी करेंगे और वर्चुअल रैलियां भी होंगी। अब से पहले के चुनावों में नीतीश कुमार हमेशा अपने सहयोगियों के लिए ड्राइवर की भूमिका में होते थे। उनका चेहरा राज्य का सबसे भरोसेमंद माना जाता था। लेकिन इस बार परिस्थिति बदली हुई है। नीतीश इस बार चेहरा तो हैं, लेकिन जानकार कहते हैं कि इस बार बीजेपी के कंधों पर ही नीतीश की नैया पार हो सकती है। विपक्ष भले ही दूर से देखने में कमजोर लग रहा हो, लेकिन ये इतना सीधा नहीं है। बीजेपी के ही एक नेता ने बताया कि राजद अब तक मुस्लिम और यादव की पार्टी मानी जाती थी और ये एमवाई समीकरण उसका पुख्ता वोट बैंक था। लेकिन पिछले कुछ समय से राजद खासतौर से तेजस्वी यादव ने पार्टी की इस छवि को बदलने की कोशिश की। राजद ने पिछड़े और अति पिछड़े जातियों को ये समझाने की कोशिश की है कि गरीब गुरबों के लिए सिर्फ उनकी ही पार्टी खड़ी रही है। शायद यही कारण है कि बीजेपी विपक्ष को कमजोर आंकने की गलती नहीं कर रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि अगर चुनाव के बाद बीजेपी की सीटें जेडीयू से अधिक भी आईं, तो भी नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे। इसमें कोई दो राय नहीं है।

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