October 20, 2020

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12 नक्सल प्रभावित जिलों से 2500 सहायक पुलिसकर्मी रांची पहुंचे

रांची:- राज्य के 12 नक्सल प्रभावित जिलों से 2500 सहायक पुलिसकर्मी शनिवार सुबह मोरहाबादी में जुटे हैं। सहायक पुलिसकर्मियों की मांग है कि उन्हें नौकरी में परमानेंट किया जाए। तीन साल पहले उनकी अनुबंध के तौर पर नियुक्ति की गई थी। कहा गया था कि उनकी ड्यूटी संतोषजनक होगी तो उन्हें परमानेंट किया जाएगा। अब उनका अनुबंध खत्म हो रहा है लेकिन अभी तक उन्हें परमानेंट नहीं किया गया है। मोरहाबादी में जुटी सहायक पुलिसकर्मियों ने कहा कि उनके प्रतिनिधिमंडल की उच्च अधिकारियों से वार्ता होगी लेकिन जब तक परमानेंट करने की प्रक्रिया शुरू नहीं होती वे यहां से नहीं जाएंगे।

शुक्रवार देर रात से जुटने लगे थे सहायक पुलिसकर्मी

वर्दी-ए-इंसाफ आंदोलन को लेकर सहायक पुलिसकर्मी शुक्रवार देर रात से मोरहाबादी मैदान में जुटने लगे थे जो सिलसिला शनिवार सुबह तक जारी रहा। देर रात यहां पहुंचे सहायक पुलिसकर्मियों ने खुले आसमान के नीचे रात गुजारी। फिलहाल, अनुशासन बनाकर सहायक पुलिसकर्मी मोरहाबादी मैदान में डटे हुए हैं।

गाड़ियों को रोका गया तो पैदल ही हुए रवाना

सहायक पुलिसकर्मियों ने बताया कि पूर्व की सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया था जिसकी समय सीमा खत्म हो गई है। ऐसे में मजबूरन उन्हें आंदोलन का रूख अख्तियार करना पड़ रहा है। पुलिसकर्मियों ने बताया कि वे यहां गाड़ियों से आ रहे थे लेकिन जिला प्रशासन ने गाड़ियों को नहीं आने दिया ऐसे में वे पैदल ही यहां पहुंचे हैं। पुलिसकर्मियों ने बताया कि उन्हें शुरुआत में कहा गया था कि आपको अपने थाना क्षेत्र में ही ड्यूटी करनी है लेकिन उनसे सभी तरह के काम लिए गए हैं। थाना से लेकर ट्रैफिक और अभियान तक में वे शामिल हुए हैं। ऐसे में उनके साथ किए गए वादे को पूरा किया जाए।

मौके पर पहुंचे ट्रैफिक एसपी, सिटी एसी और सिटी डीएसपी

2500 सहायक पुलिसकर्मियों के मोरहाबादी मैदान में जुटने के बाद रांची के ट्रैफिक एसपी, सिटी एसपी, सिटी डीएसपी यहां पहुंचे और सहायक पुलिसकर्मियों से बातचीत की। ट्रैफिक एसपी ने कहा कि उन्हें अच्छा लग रहा है कि अपनी मांगों को लेकर यहां पहुंचे सहायक पुलिसकर्मियों ने अनुशासन को बनाए रखा है। ये परिचय है कि आप पुलिसकर्मी हैं। उन्होंने सहायक पुलिसकर्मियों से कहा कि हर हाल में उन्हें अनुशासन को बनाए रखना है।

सहायक पुलिसकर्मियों का है कहना

मोरहाबादी पहुंचे सहायक पुलिसकर्मियों का कहना है कि राज्य के 12 नक्सल प्रभावित जिलों से कुल 2500 सहायक पुलिसकर्मियों की साल 2017 में नियुक्ति हुई थी। सरकार द्वारा 10 हजार का मानदेय तय किया गया था। सहायक पुलिसकर्मी के पद पर बहाल हुए अभ्यर्थियों को तीन साल के बाद स्थायीकरण करने की बात कही गई थी। हालांकि, 3 वर्ष पूरा होने के बाद भी किसी का स्थायीकरण नहीं किया गया है। यही वजह है कि राज्यभर के 2500 पुलिसकर्मी आंदोलनरत हैं।

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