October 25, 2020

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राफेल का वायुसेना में शामिल होना भारत की सम्प्रभुता को चुनौती देने वालों को एक सख्त संदेश: रक्षामंत्री

नई दिल्ली:- एयर फोर्स स्टेशन, अंबाला में एक औपचारिक कार्यक्रम में आज लड़ाकू विमान राफेल को औपचारिक रूप से भारतीय वायु सेना (आईएएफ) में शामिल कर लिया गया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की सैन्य बल मंत्री सुश्री फ्लोरेंस पार्ली ने इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। रक्षा मंत्री ने कहा कि राफेल को वायु सेना में शामिल करने का यह ऐतिहासिक क्षण है और आईएएफ के इतिहास में यह बेहद अहम मील का पत्थर है। उन्होंने कहा, राफेल सौदा भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए परिवर्तनकारी घटना है और इसके शामिल होने से दुनिया और विशेष रूप से भारत की सम्प्रभुता को चुनौती देने वालों को एक सख्त संदेश गया है। राजनाथ सिंह ने किसी भी परिस्थिति में भारत की सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता नहीं करने तथा इसके लिए हर संभव तैयारियां करने के दृढ़ संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा, “सेना के इरादे उतने ही मजबूत हैं, जितने हो सकते हैं।” रक्षामंत्री ने कहा, “हमारी रक्षा की मजबूती का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थायित्व हासिल करना है। हम ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहते, जिससे वैश्विक शांति को खतरा पैदा हो सकता है। हम अपने पड़ोसियों और दुनिया के अन्य देशों से भी यही उम्मीद करते हैं।”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्राथमिकताओं पर बात करते हुए श्री सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा प्रधानमंत्री की एक बड़ी प्राथमिकता रही है और यह उनके विज़न का ही परिणाम है कि हम रास्ते में आने वाली तमाम बाधाओं के बावजूद मजबूती से खड़े हुए हैं। रक्षा मंत्री ने कहा, “हमने रक्षा सहयोग के कई क्षेत्रों में मिलकर काम किया है। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते के तहत, मझगांव डॉक्स में 6 स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है। इस भागीदारी के आधार पर, पहली पनडुब्बी आईएनएस कलवारी 2017 में तैयार हो गई थी।” उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र और आईओआर में सामुद्रिक सुरक्षा और समुद्री डाकुओं की जैसी समान चुनौतियों से निपटने में भारत-फ्रांस सहयोग पर भी प्रकाश डाला। रक्षा मंत्री ने भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में फ्रांस के निवेश की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के आह्वान की प्रतिक्रिया में रणनीतिक भागीदारी मॉडल के अंतर्गत रक्षा उपकरणों का विनिर्माण, स्वचालित रूट से एफडीआई सीमा बढ़ाकर 74 प्रतिशत तक करना, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो रक्षा कॉरिडोर की स्थापना तथा ऑफसेट में सुधार जैसे कई नीतिगत सुधार किए गए हैं। उन्होंने कहा, “मुझे भरोसा है कि फ्रांस के रक्षा उद्योग को इसका फायदा मिलेगा और स्वदेशीकरण के हमारे सफर में फ्रांस हमारा भागीदार बना रहेगा। रक्षा मंत्री ने हाल में एलएसी के निकट त्वरित और निर्णायक फैसले लेने के लिए आईएएफ कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सीमा पर अग्रिम इलाकों में आईएएफ की संसाधनों की तैनाती से इस बात का भरोसा बढ़ा है कि हमारी वायु सेना अपनी परिचालन जिम्मेदारियों को निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। श्री सिंह ने कोविड-19 महामारी के दौरान देश के प्रयासों में योगदान के लिए भी आईएएफ की सराहना की।

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