October 22, 2020

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बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार में कैसे सफल होगी पार्टियों की वर्चुअल रैली?

राजनीतिक दलों के सामने चुनौती, 100 में से सिर्फ 59 के पास स्‍मार्टफोन

पटना:- कोरोना काल में बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां वर्चुअल रैली के जरिए वोटरों को लुभाने की कोशिश में तो जुटी हैं, लेकिन ट्राई की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मोबाइल फोन उपभोक्ताओं और इंटरनेट कनेक्टिविटी के मामले में बिहार फिसड्डी है और यहां प्रति 100 लोगों में महज 59 लोगों के पास ही फोन कनेक्टिविटी है, जबकि राष्ट्रीय औसत दर 89 है। इस रिपोर्ट में सामने आया है कि 100 लोगों में इंटरनेट के महज 32 ग्राहक हैं। जबकि राष्ट्रीय औसत 54 ग्राहक का है। यह शहरी इलाकों का हाल है। बिहार के ग्रामीण इलाकों में 89 फीसदी लोग रहते हैं। यहां 100 में से 22 लोग ही इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की मानें तो बिहार की 61 फीसदी महिलाएं और 36 फीसदी पुरुष टीवी से दूर हैं।
ट्राई की रिपोर्ट के बाद आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि हमारी पार्टी कभी वर्चुअल के समर्थन में नहीं रही और आरजेडी ने चुनाव आयोग को भी पूरी परिस्थितियों से अवगत कराया था। साथ ही कहा था कि वर्चुअल माध्यम पर रोक लगे, क्योंकि इससे ज्यादातर लोग मताधिकार से भी वंचित हो जाएंगे। जबकि बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद ने वर्चुअल को सफल बताते हुए कहा कि बीजेपी को अपने अनुभव के आधार पर ऑनलाइन और वर्चुअल में सफलता मिल रही है, क्योंकि ये भी एक मॉडल है। प्रवक्ता के मुताबिक, जहां मोबाइल फोन नहीं है वहां बीजेपी के कार्यकर्ता टेलीविजन और ब्लूटूथ के माध्यम से वोटरों को जोड़ रहे हैं और बीजेपी के सभी कार्यकर्ता न सिर्फ मोबाइल से लैस हैं बल्कि संगठन ने बूथ स्तर तक सप्तऋषि का भी गठन किया है, इसीलिए बीजेपी के लिए वर्चुअल कोई चुनौती नहीं है।

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