October 26, 2020

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174 सांसदों और विधायकों के खिलाफ इतने गंभीर मामले, जानिए क्या है सजा का प्रावधान

नई दिल्ली:- सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के लिए अलग और विशेष कोर्ट गठित करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा यह चौंकाने वाली बात है कि सांसदों, विधायकों के‌ खिलाफ देश में 4 हजार से भी ज्यादा मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट में एमिकस क्युरे की तरफ से दायर हलफनामे के मुताबिक, वर्तमान और पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ कुल 4442 मामले देश की अलग अलग अदालतों में लंबित है। इनमें से 2556 मामले सिटिंग सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित है।
इनमें से 174 सांसदों और विधायकों के खिलाफ 413 गम्भीर मामले हैं, जिनमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। लंबित मामलों की लिस्ट में सबसे ऊपर उत्तरप्रदेश का स्थान है, जहां मौजूदा और पूर्व सांसदों, विधायकों के खिलाफ कुल 1217 मामले लंबित हैं। जिनमें 446 मामले मौजूदा सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित हैं। इसके बाद बिहार का स्थान है जहां कुल 531 मामले लंबित हैं, जिनमें से 256 मौजूदा सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामले हैं।
सुनवाई के दौरान बेंच के जज जस्टिस रमन्ना ने पूछा कि 4442 मामलों में सबसे पुराना लंबित मामला कौन सा है? इसके जवाब में एमाइकस क्यूरे ने बताया कि सबसे पुराना मामला पंजाब का जो 1983 से लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के वकील पर नाराजगी से कहा कि इतने लंबे समय से मामला क्यों लंबित है। 1983 से मामला लंबित है और आप लोगों को पता नहीं, आखिर कौन इसके लिए जिम्मेदार होगा। इसपर पंजाब सरकार के वकील ने कहा कि इस संबंध में जानकारी प्राप्त करके और एक रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की जाएगी।

जस्टिस रमन्ना ने सुनवाई के दौरान कहा की अगली सुनवाई पर सभी राज्यों को का पक्ष सुना जाएगा। कोर्ट में आज सभी राज्यों से MP, MLA के दर्ज सभी मामलों की जानकारी मांगी है। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय के वकील विकास सिंह ने कोर्ट से कहा कि गंभीर अपराध के मामलों में किसी तरह का संरक्षण सांसदों और विधायकों को नहीं मिलना चाहिए। गंभीर अपराध वाले लोग MP/ MLA और मंत्री बन रहे हैं। SC ने कहा था कि संसद को फैसला लेना है कि यदि वह सजायाफ्ताहै, तो उसे अयोग्य घोषित किया जाएगा।

एमाइकस क्यूरे ने कहा कि अदालतों का गठन समस्या नहीं है, समस्या ट्रायल तेजी से और निर्धारित समय में निपटाने की है। अगली सुनवाई सोमवार को होगी। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई के दिन कोर्ट ट्रायल को लेकर निर्देश जारी कर सकता है।

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