October 30, 2020

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आहार में विविधिता से कुपोषण में आएगी कमी, बच्चों को दें पोषक आहार

बेगूसराय:- बेहतर पोषण ही शिशु को कुपोषण के दंश से बचा सकता है। बेहतर पोषण में सिर्फ आहार की अधिकता नहीं,उसे गुणवत्तापूर्ण बनाने की जरूरत होती है। राष्ट्रीय परिवार स्वस्थ्य सर्वेक्षण-4 के आंकड़ों के अनुसार बेगूसराय में पांच साल तक के 44.9 प्रतिशत बच्चे बौनापन, 18.4 प्रतिशत बच्चे दुबलापन एवं 39.1 प्रतिशत बच्चे कम वजन से ग्रसित हैं। ऐसी दशा में बच्चों के बेहतर पोषण की जरूरत है। देश को कुपोषण मुक्त करने के लिए प्रधानमंत्री ने पोषण अभियान शुरू किया है तथा सितम्बर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। जिले भर में पोषण माह के दौरान विभिन्न सामुदायिक गतिविधियों के जरिए कुपोषण में कमी लाने का प्रयास किया जाएगा।

सही पोषण का रखें ख्याल-

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय पोषण संस्थान द्वारा जारी किए गए आहार दिशा निर्देश के अनुसार गर्भावस्था के दौरान 10 से 12 किलोग्राम वजन बढ़ाना शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरुरी होता है। इसके लिए गर्भवती महिला को गर्भ की पहले तिमाही में प्रतिदिन 350 कैलोरी एवं 0.5 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। दूसरी तिमाही में 6.9 ग्राम एवं तीसरी तिमाही में 22.7 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। इसके अलावा आहार में विटामिन एवं सूक्ष्म पोषक तत्त्वों को शामिल करना भी जरुरी होता है।

मानसिक विकास के लिए फोलिक एसिड-

शरीर में खून की मात्रा बढ़ाने के लिए आयरन फोलिक एसिड एवं शिशु के मानसिक विकास को बेहतर करने के लिए आयोडीन की मात्रा आहार में लेना जरुरी है। शिशु की हड्डी एवं दांत के विकास के लिए तथा गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को कैल्शियम एवं इससे युक्त आहार का सेवन करना चाहिए। धात्री महिलाओं के लिए विटामिन-ए के साथ विटामिन बी-12 एवं विटामिन सी बेहद जरुरी होता है, ताकि शिशु के स्वास्थ्य में सुधार लायी जा सके।

आहार में जरुरी है विविधता-

बाल विकास परियोजना पदाधिकारी ने बताया की गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को अपने एवं शिशु के अच्छे स्वास्थ्य के लिए आहार में विविधता लाना जरूरी है। इससे सभी प्रकार के उपयोगी पोषक तत्वों को आहार के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। महिलाएं चावल, रोटी एवं बाजरा के सेवन से 60 प्रतिशत तक का कैलोरी प्राप्त कर सकती हैं। प्रोटीन, खनिज एवं विटामिन के लिए मौसमी फल एवं हरी साग-सब्जी सर्वश्रेष्ठ स्रोत हैं।

अवसाद होता है खतरनाक-

विटामिन-सी के अलावा गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए आयरन फोलिक एसिड की गोली, शारीरिक पोषण और मानसिक पोषण भी जरुरी है। गर्भावस्था के दौरान चिंता एवं अवसाद से गर्भ में पल रहे शिशु पर प्रतिकूल असर पड़ता है। प्राणायाम एवं ध्यान मानसिक पोषण का हिस्सा है, जिससे अवसाद एवं चिंता को दूर किया जा सकता है।

गर्भवती एवं धात्री महिलाएं रखें ख्याल-

गर्भावस्था में ज्यादा एवं कई बार भोजन करें, साबुत अनाज एवं अंकुरित चना आहार में शामिल करें। अंडा, मीट, दूध, सोयाबीन, अधिक मात्रा में सब्जी एवं फलों का सेवन लाभदायक होता है। शराब एवं तम्बाकू के सेवन से बचें तथा बगैर चिकित्सकीय परामर्श के कोई भी दवा नहीं लें। आयरन एवं कैल्शियम युक्त आहार का सेवन गर्भ के 14 से 16 सप्ताह बाद शुरू कर शिशु के जन्म के दो वर्ष तक जारी रखनी चाहिए।
आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर स्रोत-
लौह तत्त्व (आयरन) के लिए हरा साग, छिलके वाले अनाज, डालें, सूखे मेवे, मूंगफली के दाने, मांस गुड़। कैल्शियम के लिए दूध, दूध से बने पदार्थ, तिल, बादाम, सोयाबीन का दूध, शलजम, अंडा। विटामिन के लिए संतरा, गहरी हरी सब्जियां, रसीले फल, टमाटर, आंवला , सब्जियां, मांस, मछली, धूप, दूध और दुग्ध उत्पाद, सोया उत्पाद। प्रोटीन के लिए पनीर, दूध और अन्य दुग्ध उत्पाद, मिले-जुली अनाज, बीज, मूंगफली के दाने, अंडा, मांस, मुर्गी सोयाबीन।

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