November 1, 2020

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असंगठित वर्ग के लिए मृत्युदंड जैसा साबित हुआ ‘लॉकडाउन’ : राहुल गांधी

नई दिल्ली:- कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि कोरोना महामारी को लेकर बिना सोचे समझे लॉकडाउन का फैसला किया गया। उन्होंने लॉकडाउन को लेकर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने बुधवार को जारी किए अपने चौथे वीडियो में कहा कि अचानक किए गए इस लॉकडाउन से गरीब, मजदूर एवं एमएसएमई बिजनेस करने वाले काफी प्रभावित हुए हैं। यह असंगठित वर्ग के लिए मृत्युदंड जैसा साबित हुआ। ‘लॉकडाउन की बात’ शीर्षक से जारी चौथे वीडियो में राहुल गांधी ने कहा कि कोरोना के नाम पर अचानक लगा लॉकडाउन असंगठित क्षेत्र पर नोटबंदी औरजीएटी के बाद तीसरा वार है। बिना सोचे-विचारे लगा यह लॉकडाउन छोटे दुकानदार, स्मॉल एंड मीडियम बिजनेस वालों पर, किसान और मजदूरों के हितों पर हमला है। लोग रोज कमाते रोज खाते हैं। छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापार के साथ भी ऐसा ही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि कोरोना से 21 दिन की लड़ाई होगी, लेकिन इस 21 दिन में असंगठित क्षेत्र के रीड की हड्डी ही टूट गई। हालांकि कोरोना अब भी विकराल मुंह खोले खड़ा है। उन्होंने कहा कि भूख और विस्थापन से मौत, उद्योगों पर ताला और बेहिसाब बेरोजगारी मोदीजी का मास्टरप्लान है। किसान, मजदूर और लघु व मध्यम वर्ग के उद्योगों ने भारत की अर्थव्यवस्था को खड़ा किया, जिसे बर्बाद कर इस सरकार ने अर्थव्यवस्था को गर्त में डाला है। अपने इस वीडियो में राहुल गांधी ने एक बार फिर कांग्रेस के ‘न्याय’ योजना की तरफदारी की। उन्होंने कहा कि जब लॉकडाउन के बाद खुलने का समय आया तो कांग्रेस ने कई बार सरकार से कहा कि वो गरीबों की आर्थिक मदद करें। इसके लिए ‘न्याय’ जैसी एक योजना लागू करनी पड़ेगी, बैंक के अकाउंट में सीधा पैसा डालना पड़ेगा लेकिन सरकारी ने ऐसा नहीं किया। यहीं नहीं कांग्रेस ने छोटे एवं मध्यम वर्ग के व्यापारियों के लिए पैकेज तैयार करने को कहा ताकि उन्हें बचाया जा सके। यहां भी सरकार चुप रही। गरीब जरूरतममंदों की मदद के बजाय सरकार ने गिने-चुने अमीर बिजनसमैनों का लाखों करोड़ों रुपये टैक्स माफ किया। लॉकडाउन के लिए सरकार को दोषी ठहराते हुए राहुल ने वीडियो के आखिर में फिर कहा कि यह ‘लॉकडाउन’ कोरोना पर नहीं बल्कि हिंदुस्तान के गरीबों पर आक्रमण था। हमारे युवाओं के भविष्य पर आक्रमण था। लॉकडाउन मजदूर किसान और छोटे व्यापारियों पर आक्रमण था। हमारी असंगठित अर्थव्यवस्था पर आक्रमण था। ऐसे में हमें इस बात को समझना होगा और इस आक्रमण के खिलाफ सबको एक साथ मिलकर खड़ा होना होगा।

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