October 27, 2020

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कला का जादू, तस्वीर को मूर्ति में बदलने की है महारत हासिल

पीएम की अपील से मूर्ति व खिलौने की मांग बढ़ने की उम्मीद

रांची:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी खिलौनों के निर्माण को बढ़ावा देने के संदेश ने मूर्ति निर्माण से जुड़े कलाकारों को संबल प्रदान किया है। रांची में भी एक ऐसे मूर्तिकार हैं जिनका मानना है कि वर्तमान समय में कलाकारों को बढ़ावा मिला है। साथ ही उनके द्वारा बनाए गए वस्तुओं की मांग में भी वृद्धि हुई है।
हुनर के बल पर आत्मनिर्भर होकर अपना घर संसार चलाने कि बात हो या फिर राज्य स्तरीय पहचान बनाने की, राजधानी रांची के राजेश प्रजापति ने दोनों ही परिस्थितियों में मिशाल कायम की है। मूर्ति निर्माण को स्वरोजगार का जरिया बना कर राजेश प्रजापति अपनी बेटियों को अच्छी शिक्षा देने में सक्षम हुए और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा किया। राजेश के हाथों में कला का इस तरह का जादू है कि वे किसी भी तस्वीर को मूर्ति बदलने में महारत हासिल कर चुके है। रांची ही नहीं, राज्य के विभिन्न हिस्सों से लोग अपने पूर्वजों व अन्य लोगों की तस्वीर लेकर आते है और उस तस्वीर को मूर्ति में बदलने के लिए मुंहमांगी कीमत देने को तैयार रहते है। वर्षाें से मूर्ति और खिलौना बनाने में जुटे राजेश की अच्छी आमदनी भी अच्छी हो जाती है और इसी की बदौलत उन्होंने अपनी एक बेटी को फैशन डिइजानर का कोर्स कराया, जबकि उनकी दूसरी बेटी बीबीए और बेटा अच्छी शिक्षा हासिल करने में जुटा है।
राजेश प्रजापति का कहना है कि एक दौर था जब यहां के बाजारों में विदेशी खिलौनों और मूर्तियों की भरमार थी। स्थानीय कलकारों का हाल जानने वाला कोई नहीं था। खुशी इस बात की है कि वर्तमान में केंद्र में एक ऐसी सरकार है जिसे कलाकारों की चिंता है।राजेश कहते हैं की सरकार द्वारा विभिन्न स्तरों पर ऐसी पहल की जा रही है जिसका लाभ उन जैसे हुनरमंद लोगों को मिल रहा है।
मूर्ति निर्माण से जुड़े राजेश प्रजापति को अपने घर परिवार का भरपूर सहयोग मिलता है। पत्नी सीता देवी और बच्चो को इस बात का गर्व है कि वे एक कलाकार के घर से जुड़े हैं।उन्होंने कहा कि मूर्ति बनाने के लिए मिट्टी तैयार करने, फिर भट्ठी में पकाने और रंगने तथा अंत में कपड़े पहनाने के हर काम में परिवार का सहयोग होगा है।
फैशन डिजाइनर बन चुकी बड़ी बेटी कृति कुमारी कहती हैं कि वो भी झारखंड कि कला को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगी। उन्होंने कहा कि प्रारंभ में इस कला के व्यवसायिक उपयोग और बाजार की उपलब्धता के बारे में पूरी जानकारी उनके पास नहीं थी, लेकिन अब धीरे-धीरे वह काफी कुछ सीख-समझ रही है।
राजेश प्रजापति मिट्टी, प्लास्टर ऑफ पेरिस और फाइबर से मूर्तियों का निर्माण करते हैं। इनके हाथों से बनी देवी देवताओं और महापुरूषों की मूर्तियां कई जगहों की शोभा बढ़ा रही हैं।

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